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गांवों में भरने लगा पानी, सुरक्षित स्थान पर जाने की निर्देश

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रामगढ़ क्षेत्र के सोनार टोला में फटा कटान को रोकने के लिए बनाया स्पर। - फोटो : BALLIA
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दयाछपरा/रामगढ़। गंगा के बाढ़ का पानी गोपालपुर, दुबेछपरा गांव में फैलने की सूचना मिलते ही अधिकारी दौड़ पड़े। पहले एसडीएम बाद में जिलाधिकारी ने मौके का निरीक्षण किया और अधिकारियों से बाढ़ से बचाव के निर्देश दिए। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया गया है।
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एसडीएम बैरिया अभय सिंह दुबेछपरा हनुमान मंदिर पर बाढ़ चौकी स्थापित कर दी। डीएम आदिती सिंह भी शुक्रवार दोपहर में गोपालपुर पहुंची। पीड़ितों को सुरक्षित स्थान पर जाने का निर्देश दिया। बाढ़ विभाग के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम को गोपालपुर में कैंप करने का निर्देश दिया। कटान पीड़ितों को आश्वासन दिया कि शासन स्तर से मिलने वाली हर सहायता आप लोगों को उपलब्ध कराई जाएगी। इस बार जैसे गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार किया तो पानी करीब 25000 की आबादी में फैलना शुरू हो गया है। देर शाम तक गंगा का पानी उदई छपरा, गोपालपुर दुबे छपरा, प्रसाद छपरा आदि गांवों तक फैल जाएगा। शनिवार सुबह तक अलाम रॉय के टोला, पांडेयपुर होते हुए टेंगरही तक पहुंचने की आशंका है। इसके चलते, दर्जनों गांव टापू में तब्दील हो जाएंगे। इस मौके पर एडीएम फाइनेंस रामआसरे, तहसीलदार शिवसागर दुबे, एक्सईएन संजय मिश्रा, एसडीओ कृष्ण गोपाल पांडेय मौजूद रहे। जैसे डीएम गोपालपुर पहुंची, ग्रामीणों ने समस्याओं की बौछार लगा दी। पंकज तिवारी ने कहा कि आज जो स्थिति पैदा हुई है उसके लिए बाढ़ विभाग जिम्मेदार है। उधर, डीएम ने दुबेछपरा, गोपालपुर दौरे के समय सीएमओ डॉ. तन्मय कक्कड़ के न पहुंचने पर नाराजगी व्यक्त की। एडीएम फाइनेंस को सीएमओ को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। बाद में चिकित्साकर्मियों की सूचना पर सीएमओ गोपालपुर पहुंचे। दवा व चिकित्सा व्यवस्था का जायजा लिया।
तटवर्ती इलाकों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ी
नरहीं। गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि से गड़हांचल के तटवर्ती इलाकों में चिंता सताने लगी है। तटवर्ती इलाकों में सब्जी एवं खरीफ की खेती करने वाले किसानों की धड़कनें तेज हो गईं। गंगा का जलस्तर खेतों के करीब पहुंच गया है। बढ़ाव रात एक बजे से चार सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से है। ख़तरे के निशान से एक मीटर नीचे है। गंगा का जलस्तर बढ़ने पर इच्छा चौबे का पूरा, शाहपुर बभनौली, बरकंटी, गंगहरा, रैया खाड़ी, बड़का खेत, पलियाखास, सरवनपुर, कुल्हड़िया, रामगत का डेरा, कोट मझरियां, टेढ़वा के मठिया, सोवंथा नई बस्ती आदि गांवों के लोगों को घर छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
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