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मेडिकोलीगल के लिए लगा रहे वाराणसी की दौड़

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जिला महिला अस्पताल में करीब तीन वर्ष से बंद पड़ा अल्ट्रासाउंड। - फोटो : BALLIA
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बलिया। जिला अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट की तैनाती नहीं होने के कारण एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड बंद है। ऐसे में मरीजों को निजी जांच केंद्रों की मदद लेनी पड़ती है। सबसे ज्यादा दिक्कत तो मारपीट के बाद मेडिकोलीगल कराने में होती है। इसके बिना मुकदमा दर्ज ही नहीं होता है। लिहाजा लोग बनारस से जांच करा रहे हैं। यह स्थिति महीने भर से बनी हुई है।
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एक्स-रे में जाहिर होने वाली चोट के अधार पर ही मुकदमों की विवेचना तथा धाराओं की बढ़ोत्तरी होती है। इस प्रकार के अधिकांश मामलों की जिम्मेदारी सम्बंधित थाने की पुलिस पर होती है, जो खुद लिखा-पढ़ी करने के बाद एक्स-रे कराती है। जिला अस्पताल का रेडियोलॉजिस्ट एक्स-रे के अधार पर रिपोर्ट लगाता है। इसके बाद पुलिस विवेचना करती है। दरअसल जिले में रेडियोलॉजिस्ट के नहीं होने से मेडिकोलीगल एक्स-रे बंद है। ऐसे में जनपदों से लोगों को आजमगढ, वाराणसी के लिए रेफर किया जा रहा है। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी रहे डा.संजय सिंह जिला अस्पताल के रेडियोलाजिस्ट पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का आवेदन सीएमएस डा.विनोद सिंह सौंप कर अपने घर चले गए हैं। इन्हें प्रशासनिक दबाव के आधार पुन: अस्पताल में वापस लाने के सभी प्रयास बेमानी साबित हो रहे हैं। फिलहाल पीड़ितों को मेडिकल लीगल के लिए जिला अस्पताल से वाराणसी लिए रेफर किया जा रहा है। इस सम्बन्ध में सीएमएस डॉ. दिवाकर सिंह ने कहा कि अस्पताल में महंगा और सबसे अच्छा डिजिटल एक्स-रे हो रहा है। मेडिकोलीगल केसों में रेडियो लाजिस्ट के न होने के कारण बाहर भेजना हमारी मजबूरी है। शासन को रेडियोलाजिस्ट और न्यूरोलाजिस्ट के लिए लिखा गया है लेकिन किसी की तैनाती नहीं हुई।
महिला अस्पताल में धूल फांक रही मशीन
बलिया। जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की जांच करीब तीन वर्षों से बंद चल रही है। हालात यह है कि प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों को बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है। हालांकि वर्तमान में महिला चिकित्सालय में तैनात चिकित्सकों को इमरजेंसी के लिए अल्ट्रासाउंड की ट्रेनिंग दी गई है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। जिला महिला चिकित्सालय में करीब तीन साल से अल्ट्रासाउंड बंद चल रहा है। महिला चिकित्सालय की ओपीडी में प्रतिदिन करीब चार सौ मरीजों को देखा जाता है। इसमें से करीब 60 से 100 को तो अल्ट्रासाउंड के लिए डाक्टर लिखती हैं। जिला अस्पताल में आला अधिकारियों, मंत्री, विधायक, सांसद सभी का आना जाना लगा रहता है लेकीन जिला अस्पताल की व्यवस्था पर किसी का ध्यान आकृष्ट न हो सका है। सीएमएस ने शासन से लेकर जिला प्रशासन को रेडियोलाजिस्ट की तैनाती के लिए कई बार पत्र लिखा गया।
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