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यूपी बोर्ड : हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा शुल्क के 8.96 करोड़ रुपये फंसे

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यूपी बोर्ड ने रिजल्ट तो घोषित कर दिया, लेकिन अभी तक छात्र-छात्राओं के परीक्षा शुल्क के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। जिले के हाईस्कूल और इंटर के विद्यार्थियों ने परीक्षा शुल्क के लिए 8.96 करोड़ से अधिक की राशि जमा की थी। डीआईओएस के अनुसार अभी इस बारे में बोर्ड से कोई ऐसा आदेश प्राप्त नहीं हुआ है कि परीक्षा शुल्क वापस किया जाएगा या नहीं।
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कोरोना संक्रमण की वजह से शासन स्तर से परीक्षाएं रद्द कर बिना इम्तेहान के ही छात्र-छात्राओं को पास करने का निर्णय लिया गया था। बोर्ड की परीक्षा के लिए जिले में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में इस बार कुल छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें हाईस्कूल में 84055 छात्र संस्थागत तौर पर पंजीकृत थे। इनमें 50468 छात्र और 33587 छात्राएं शामिल थी। इसके अलावा व्यक्तिगत तौर पर हाईस्कूल में 359 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था,जिनमें 267 छात्र व 92 छात्राएं थी। जबकि इंटरमीडिएट 76645 छात्र पंजीकृत थे,जिसमें छात्र 46598 और छात्राएं 30047 शामिल थी। इसके अलावा प्राइवेट से इंटर में 2145 पंजीकृत थे, जिनमें 1569 छात्र और 576 छात्राएं शामिल थी। इन सभी छात्र-छात्राओं की ओर से परीक्षा देने से पहले आवेदन करते समय परीक्षा शुल्क भी जमा करवाया गया था। परीक्षा शुल्क के तौर पर हाईस्कूल के विद्यार्थी से 501 रुपये और इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं से 601 रुपये लिए गए थे। हाईस्कूल के छात्रों का रुपये और इंटर के छात्रों की रुपये शामिल हैं। इस तरह से विद्यार्थियों से कुल रुपये परीक्षा शुल्क के नाम पर वसूले गए। अब बोर्ड ने बिना परीक्षा कराए ही परिणाम जारी कर दिया है, लेकिन परीक्षा शुल्क वापस करने के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में छात्र-छात्राओं के साथ उनके अभिभावकों को भी संशय बना हुआ है कि परीक्षा शुल्क वापस मिलेगा या नहीं।
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