करीब 150 साल पहले बकुल्हा और मांझी रेेलवे स्टेेेशन के बीच अंग्रेजों के बनाए पुल पर एक्सप्रेस ट्रेनों व मालगाड़ियों का आवागमन जारी हैै। इस जर्जर पुल से ट्रेनों के गुजरते समय यात्रियों की धड़कनें भी बढ़ जाती है।
बताया जाता है कि बकुल्हा व मांझी रेलवे स्टेशन के बीच घाघरा नदी पर अंग्रेजों ने वर्ष 1856 में पुल का निर्माण करवाया था। इसके बाद वर्ष 1933 में आए भूकम्प के झटके से पुल के कई पाए क्षतिग्रस्त हो गए थे। ब्रिटिश अधिकारियों ने मरम्मत कराकर पुन: पुल पर आवागमन बहाल करा दिया। इन्हीं बूढ़े पाए के पुल पर आज भी राजधानी जैसी ट्रेनें दौड़ाई जा रही हैं। जबकि 300 करोड़ की लागत से बन रहे नए रेल पुल का निर्माण कार्य करीब पांच वर्ष पहले शुरू हुआ, लेकिन अब तक इसके मात्र पाए ही खड़े हो सके हैं।
पुल का निर्माण कार्य इस कदर धीमी गति से चल रहा है कि इसके पूरा होने में कई साल लग सकते है। पुराने पुल पर ट्रेनों के गुजरते समय यात्रियों की धड़कने बढ़ जाती है, लेकिन नए पुल के निर्माण में तेजी को लेकर रेल प्रशासन सुस्ती जारी है।