फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ballia Election Seat Result: किसके सिर सजेगा माननीय का ताज, इसका फैसला आज

Thu, 10 Mar 2022 11:18 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

बलिया नगर की सीट इस बार सपा और भाजपा के दोनों के लिए नाक का सवाल बनीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

करीब एक महीने तक चले सत्ता संग्राम का आज परिणाम आ जाएगा। त्रिस्तरीय सुरक्षा में होने वाली ईवीएम में बंद मतों की गिनती से स्पष्ट हो जाएगा 82 दावेदारों की लंबी फेहरिस्त से अपने नुमाइंदे के तौर लोगों ने उन किन सात लोगों का चुनाव किया है, अगले पांच वर्ष तक उनका भाग्य विधाता होगा।
विज्ञापन


बीते आठ जनवरी को घोषित विधान चुनाव के छठें चरण में जिले की सात विधानसभा सीट पर बीते तीन मार्च को मतदान हुआ था। इसके लिए भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस के अलावा सुभासपा, आप, एआईएमआईएम, विकासशील इंसान पार्टी(वीआईपी), जनअधिकार पार्टी, जन लोक विकास पार्टी, राष्ट्रीय समाज पार्टी, राष्ट्रीय युवा मोर्चा दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, बहुजन मुक्ति पार्टी, निषाद पार्टी, लोजपा आदि राजनीतिक दलों के अलावा करीब दो दर्जन से अधिक निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनावी अखाड़े में ताल ठोकी थी। जिनकी तकदीर तीन मार्च को मतदाताओं ने ईवीएम में बंद कर दी है। इनमें कुछ सूबे की सियासत के सूरमा है तो कुछ सियासी धुरंधर। जिन विधान सभा के चुनाव परिणामों को लेकर लोगों में खासी उत्सुकता है, उनमें फेफना, बलिया नगर, बैरिया, बांसडीह सीट है।

सिर्फ एक क्लिक पर जानें हर विधानसभा सीट का नतीजा
विज्ञापन


इसके अलावा सिकंदरपुर, रसड़ा और बेल्थरारोड(सुरक्षित) विस सीट के परिणामों पर भी सियासी पंडित टकटकी लगाए है। फेफना विस से प्रदेश सरकार खेल व युवा कल्याण मंत्री उपेंद्र तिवारी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, जहां सपा के उम्मीदवार और पूर्व विधायक संग्राम सिंह उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं। इसके अलावा बलिया नगर की सीट इस बार सपा और भाजपा के दोनों के लिए नाक का सवाल बनीं है। यहां सपा के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री नारद राय अपनी सियासी पारी को संजीवनी देने के लिए संघर्ष कर रहे है तो वर्ष 2016 में बसपा सुप्रीमो मायावती पर टिप्पणी कर सूबे में अपनी सियासी पहचान बनाने वाले हैवीवेट नेता व भाजपा प्रदेश संगठन के उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह जीत दर्ज कर इस सीट पर भाजपा का दबदबा कायम रखने की जद्दोजहद करते नजर आ रहे है।

पूर्व में द्वाबा के नाम से महशहूर बैरिया विधान सभा की सीट इस बार सपा, भाजपा, बसपा और बिहार सरकार में साझीदार वीआईपी के लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल बनीं है। इस सीट पर योगी सरकार के राज्यमंत्री और बलिया नगर से विधायक आनंद स्वरुप शुक्ल अपनी सियासी पारी को धार देने की कवायद कर रहे है तो दूसरी ओर बीजेपी में टिकट कटने से बागी बनें विधायक सुरेंद्र सिंह वीआईपी की नाव पर सवार होकर चुनावी वैतरणी पार करने पर जोर लगा रहे है। जबकि सपा उम्मीदवार व पूर्व विधायक जय प्रकाश अंचल जातिय गुणा-गणित के आधार पर तो बसपा के पूर्व विधायक सुभाष यादव यादव व दलित गठजोड़ की मंशा पाले चुनाव मैदान में है।

इस लिंक पर क्लिक करें और उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजों से हो जाएं रूबरू

प्रदेश की हाट सीटों में शुमार बांसडीह विधान सभा की सीट एक ओर भाजपा के लिए मिथक बनीं है, जिसे तोड़ने के लिए पार्टी ने इस बार निषाद पार्टी के बैनर और अपने सिंबल पर एक दशक से सियासी पारी के आगाज के लिए संघर्ष कर रही केतकी सिंह पर दांव लगाया है तो सपा ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे रामगोविंद चौधरी को मैदान में उतारा है। अगर इस सीट पर केतकी को जीत नसीब होती है तो भाजपा मिथ्क तोड़ने में कामयाब होगी। साथ ही नेता प्रतिपक्ष की चुनावी पारी पर प्रश्नवाचक चिन्ह लग जाएगा और यदि सपा अपना कब्जा बरकरार रखती है तो केतकी और भाजपा दोनों को इंतजार करना होगा।
विज्ञापन


इसके अलावा सिकंदरपुर की सीट पर विधायक संजय यादव जहां भाजपा का कब्जा बरकरार रखने की जद्दोजदह करते दिख रहे है तो सपा के मोहम्मद जियाउद्दीन रिजवी इस सीट को सपा की झोली में डालने की कशमकश करते दिखें। बेल्थरारो सुरक्षित सीट इस बार सपा की सहयोगी सुभासपा के हंसु राम, भाजपा के छठ्ठू राम और बसपा प्रवीण प्रकाश मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे है। जबकि रसड़ा में बसपा विधायक दल के नेता उमाशंकर सिंह के लिए चुनाव प्रतिष्ठापरक बन गया है। इस सीट पर भाजपा के बब्बन राजभर और सुभासपा के महेंद्र चौहान उमाशंकर के मुकाबिल है। चर्चा है कि सुभासपा उम्मीदवार ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। कुल मिलाकर अब स्पष्ट हो जाएगा कि सातों सीट पर माननीय का ताज किसके सिर सजेगा।

इनकोर साफ्टवेयर से जल्द आयेगा परिणाम
इस बार करीब 7102 से अधिक मतदाताओं ने पोस्टल बैलेट से मतदान किया है। बाहर तैनात कर्मचारियों के पोस्टल बैलेट भी गिनती के लिए अलग कार्मिक होंगे। इस बार चुनाव के परिणाम में देरी न हो, इसके लिए आयोग की ओर से एप की मदद ली जा रही है। नए सॉफ्टवेयर इनकोर के जरिए ईवीएम में मतों की गिनती की जाएगी। सॉफ्टवेयर में मतगणना के समय ही नतीजे दर्ज करने की व्यवस्था है
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें