बलिया। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में शनिवार को एक बेबस मां अपने 32 वर्षीय बेटे का शव लेकर 1.5 घंटे तक रोती बिलखती रही, लेकिन अस्पताल का कोई कर्मचारी नहीं पहंुचा। इतना ही नहीं पास स्थित पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी भी नहीं पहंुचे। इस दौरान बेटे के शव के पास बैठी मां बार-बार इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों पर बिना इलाज किए वाराणसी रेफर करने का आरोप लगाती रही।
रेवती कस्बा के भटवलियां निवासी सबुझपरी देवी (68) के बेटे अमरदीप (32) के पैर में घाव हो गया था। घाव के कारण पैर खराब हो गया था। हालत खराब होने पर सबुझपरी देवी एंबुलेंस से बेटे को लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में दोपहर दो बजे पहुंची। सबुझपरी देवी ने बताया कि इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक व अन्य कर्मचारी बेटे की हालत देखकर नाक दबाते हुए वाराणसी रेफर कर दिया। जबकि की मैंने उनसे बार-बार गरीबी का हवाला देते हुए इलाज के लिए गुहार लगाई। कोई कर्मचारी नहीं आया। एंबुलेंस चालक ने बेटे की हालत देख रास्ते में पांच घंटा लगने की बात कही।
तब तक छोटा बेटा व एक रिश्तेदार भी आ गए। परिवार वाले चिकित्सक से अस्पताल में भर्ती कर इलाज करने की बात कही, लेकिन उन्होंने खतरा बताते हुए मना कर दिया। परिजन अमरदीप को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए एक टेंपू लेकर आए, लेकिन उसने भी हालत देखकर ले जाने से मना कर दिया। इसी बीच करीब साढ़े तीन बजे अमरदीप की मौत हो गई। बुजुर्ग मां बेटे का शव लेकर जमीन पर दो घंटे तक बैठी रही। काफी गुहार लगाने पर शाम 5. 40 बजे के बाद शव वाहन से घर भेजवाया गया।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके यादव ने बताया कि इमरजेंसी में पैर में घाव होने व ज्यादा इंफेक्शन वाला एक मरीज आया था। सर्जन ने देखने के बाद उसे हायर सेंटर रेफर किया था। हमने चिकित्सक से जब तक मरीज को परिजन नहीं ले जाते तब तक इलाज व घाव की मरहम पट्टी का निर्देश दिया था। परिजनों के आरोप की जांच की जाएगी, दोषी मिलने पर कार्रवाई भी होगी।