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Ballia News: बाढ़ से पहले ही गंगा में समाने लगे 35 करोड़ से बचाव के लिए बने ढांचे

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गंगा नदी में समाहित हुआ चक्की नौरंगा में किया गया पार्को पाइन कार्य।जागरुक पाठक - फोटो : अमर उजाला
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मझौवां । गंगा नदी के दक्षिणी तट पर नौरंगा, भुआल छपरा और चक्की नौरंगा गांवों को कटान से बचाने के लिए करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से चल रही दो कटानरोधी परियोजनाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
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ग्रामीणों का आरोप है कि चक्की नौरंगा के पास लगाए जा रहे पार्कोपाइन (कटानरोधी ढांचे) बाढ़ आने से पहले ही हल्के जल प्रवाह और हवा के दबाव में गंगा में समा रहे हैं। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी धन के बंदरबांट को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब ढाई किलोमीटर लंबी परियोजना के तहत 2300 मीटर क्षेत्र में आठ लेयर में पार्कोपाइन लगाए जाने हैं। तकनीकी मानकों के अनुसार, त्रिभुजाकार संरचना के बीच राट ईंट भरकर उसे लोहे की जाली में पैक कर मजबूत तरीके से बांधा जाना चाहिए, लेकिन मौके पर ऐसा नहीं हो रहा है। आरोप है कि राट ईंट के स्थान पर हरे पेड़ों की टहनियां भरकर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है, जिससे पूरी संरचना कमजोर हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक लगभग 1200 मीटर क्षेत्र में ही पार्कोपाइन लगाए गए हैं। उनका सवाल है कि जो ढांचे सामान्य परिस्थितियों में ही टिक नहीं पा रहे हैं, वे बाढ़ के दौरान गंगा की तेज धारा और दबाव का सामना कैसे करेंगे।
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परियोजना के तहत 300-300 मीटर की दूरी पर 18 कटर बनाए जाने हैं, जिनके बीच गैपिंग में पार्कोपाइन लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस कार्य में भी निर्माण मानकों की अनदेखी की जा रही है। सबसे अधिक सवाल कंक्रीट के पिलरों की गुणवत्ता पर उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, निर्माण सामग्री की स्वतंत्र गुणवत्ता जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

घटिया कंक्रीट का आरोप: ग्रामीणों का दावा है कि विभाग द्वारा एम-15 ग्रेड कंक्रीट के उपयोग की बात कही जा रही है, जबकि कई पिलर जमीन पर रखते ही टूट रहे हैं और उनमें दरारें साफ दिखाई दे रही हैं।
खतरे में गांव: स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 35 हजार आबादी की सुरक्षा से जुड़ी इस परियोजना में यदि निर्माण की गुणवत्ता से समझौता किया गया, तो बाढ़ के समय गांवों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
अधिकारी का पक्ष: दूसरी ओर, बाढ़ खंड के सहायक अभियंता श्रवण कुमार प्रियदर्शी ने ग्रामीणों के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य स्वीकृत तकनीकी मानकों के अनुरूप ही कराया जा रहा है तथा पार्कोपाइन निर्माण में एम-15 ग्रेड कंक्रीट के पिलरों का ही प्रयोग हो रहा है।
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