बलिया। पिछले तीन दिनों से कहीं आंधी, बारिश तो कहीं धूप हो रही है। कृषि विभाग इसे प्री मानसून तो किसान रोहिणी नक्षत्र में इस बारिश को खेती के लिए लाभदायक मान रहे हैं। इस बारिश से खरीफ की बोआई के लिए खेतों को तैयार करना आसान हो जाएगा।
खेती किसानी से जुड़े लोग आज भी महाकवि घाघ की कहावतों पर विश्वास करते हैं। घाघ की कहावत रोहिणी बरसे, मृग तवे, कुछ दिन आद्रा जाए,.. को लेकर किसानों का मानना है कि वर्तमान में रोहिणी नक्षत्र है और इस समय की बारिश खेती के लिए लाभदायक है। बारिश होने के बाद खरीफ की बोआई के लिए खेतों जोताई करना आसान हो जाता है और इसके बाद मृग नक्षत्र में होने वाले तेज धूप में खेतों के खर-पतवार नष्ट हो जाते हैं। इससे खेतों में बोई जानी फसलें निरोग होती हैं। जिले में सोमवार को कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई। इससे किसान खरीफ की तैयारी में जुट गए हैं। कई किसानों ने तो रोहिणी में धान की नर्सरी भी लगा रखी है जिसके लिए यह बारिश काफी लाभदायक है। उधर, कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि आम तौर पर 15 जून से मानसून की शुरुआत होती है और यह मौसम प्री मानसून का असर है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में कुल 7960 हेक्टेयर में धान की नर्सरी लगाई जानी है।
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252815 हेक्टेयर में खरीफ की बोआई का लक्ष्य
बलिया। कृषि विभाग भी खरीफ को लेकर तैयारी में जुट गया है। इस साल जिले में कुल 252815 हेक्टेयर में खरीफ फसल का लक्ष्य है। इसमें धान 119400 हेक्टेयर, बाजरा 480 हेक्टेयर, ज्वार 2177 हेक्टेयर, मक्का 26360 हेक्टेयर, मूंग 7 हेक्टेयर, अरहर 17968 हेक्टेयर में बोआई होगी। इसके अलावा मडुआ, कोदो की 11 हेक्टेयर और मूंगफली की बोआई 647 हेक्टेयर में होगी।
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यह मौसम खेती किसानी के लिए लाभदायक है और आसमान में कई दिनों से बादल छाने व बारिश होना प्री मानसून का लक्षण है। इस समय बारिश होने से किसान समय से धान की नर्सरी लगाना शुरू कर देंगे जिससे पैदावार अच्छी होने की संभावना है।- विकेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी, बलिया।