जिले में सड़कों की बदहाल दशा सुधरने का नाम नहीं ले रही है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए कई बार अभियान भी चला लेकिन सब कागजों तक ही सिमट कर रह गया। गड़वार-सुखपुर-बेरुआरबारी मार्ग पर गड्ढा मुक्ति के लिए गड्ढों की सफाई कर ही गड्ढा मुक्ति कर दी गई। नतीजा ये गड्ढे राहगीरों के लिए भी जानलेवा बने हैं।
सरकार की ओर से कई बार सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का अभियान चलाने का फरमान जारी किया गया। तीन माह पहले भी शासन की ओर से राजमार्ग व ग्रामीण इलाके की सड़कों को अभियान चलाकर सड़कों को गड्ढामुक्त करने का निर्देश दिया गया। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी यह अभियान पूरी तरह परवान नहीं चढ़ सका। हालांकि इस वर्ष लगातार हुई बारिश से भी अभियान बाधित रहा। अभियान के तहत पीडब्लूडी के दोनों खंडों की ओर से कुल 164.462 किमी लंबी सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए चिह्नित किया गया। इसमें पीडब्लूडी प्रांतीय खंड की ओर से 42.96 किमी की 13 सड़कें व निर्माण खंड की ओर से 121.532 किमी की 64 सड़कें रहीं। इसके अलावा ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की ओर से 5.80 किमी की तीन सड़कों को गड्ढा मुक्त के लिए चिह्नित किया गया था। इसी तरह जिला पंचायत ने 34.735 किमी की 28 सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए चिह्नित किया था। नगरीय नगरीय क्षेत्र के 42.55 किमी लंबी 91 सड़कों को चिह्नित किया गया। लेकिन धरातल पर सड़कें पूरी तरह गड्ढा मुक्त नहीं हो सकी है। आलम यह है कि शहर से लेकर गांव तक की सड़कें अभी भी बदहाल हैं।
कई सड़कों का हाल बेहाल
बैरिया। सुरेमनपुर-दुर्जनपुर-श्रीकांतपुर मार्ग पर पूूरी तरह गड्ढों में तब्दील है। एक माह पूर्व गड्ढों में गिट्टी डालकर उसे भरने का प्रयास किया गया लेकिन अभी भी सड़क की स्थिति दयनीय है। इसके कुछ दिन बाद ही पांच करोड़ रुपये की लागत से झाड़ू बाबा के स्थान से गोपालनगर तक तीन किमी व रामबालक बाबा के स्थान से दुर्जनपुर तक तीन किमी जर्जर सड़क को सीसी रोड निर्माण के लिए शासन स्तर से स्वीकृत किया गया। उक्त दोनों सड़कों के लिए शासन से धन स्वीकृत होने के बाद स्वीकृत धन का 10 प्रतिशत धनराशि लोक निर्माण विभाग के खाते में पहुंच गया है। लेकिन अब तक रामबालक बाबा स्थान सुरेमनपुर-दुर्जनपुर सड़क मार्ग का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
गड्ढा मुक्त अभियान का नहीं रहा क्षेत्र में असर
जयप्रकाश नगर। एनएच 31 स्थित बलराम सिंह के डेरा से धतुरी टोला मार्ग को तत्कालीन विधायक द्वारा वर्ष 1983 में निर्माण करवाया गया था। जिसकी विशेष मरम्मत का कार्य वर्ष 2016 - 17 में करीब 8 लाख की लागत से करवाया गया जो आज पुन: करीब पांच वर्ष बीतते ही जर्जर हो चला है। लेकिन इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। वहीं एनएच 31 स्थित चांददीयर चौराहे से बकुल्हा रेलवे स्टेशन जाने वाला सम्पर्क मार्ग जर्जर होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
किसी सड़क की नहीं बदली सूरत
बेल्थरारोड। सोनाडीह ढाला से बांसपार बहोरवा जाने वाला मार्ग गड्ढे के रूप में तब्दील होकर दुर्घटना को आमंत्रण दे रहा है। इस मार्ग के निर्माण के लिए क्षेत्रीय जनता ने सड़क पर धान रोप कर विरोध प्रदर्शन भी किया, लेकिन जनप्रतिनिधि और अधिकारी उदासीन बने रहे। तुर्तीपार चट्टी से मऊ जनपद की सीमा हाहानाला तक बंधे का मार्ग जर्जर है। इसके साथ ही फरसाटार- तेलमा मार्ग, सीयर- मिश्रौली मार्ग, सीयर- पशुहारी- पूरा मार्ग जर्जर है। सरकार के फरमान के बावजूद सड़कों की सेहत में सुधार नहीं होने से सरकारी कार्य पद्धति पर सवालिया निशान लग गए हैं।
अभियान के तहत चिह्नित सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का काम किया गया। कई जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण होना है लेकिन अब चुनाव बाद ही कार्य शुरू किए जाएंगे।
- सीपी गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, पीडब्लूडी, बलिया वृत्त।