अगस्त क्रांति पर आयोजित अमृत महोत्सव कार्यक्रम के दौरान चित्तू पांडेय चौहारा पर नारेबारी करते उ
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बलिया/गड़वार। अंग्रेजों भारत छोड़ो के नारे की बलिया एक अमिट निशानी है, जर्जर तन बूढ़े भारत की यह मस्ती भरी जवानी है...। रिमझिम फुहारों के बीच ढोलक की थाप पर आजादी के तराने गाते हुए शहीद पार्क चौक से युवाओं की टोली निकली तो लोग देखते रह गए। मौका था स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कल्याण परिषद के अगस्त कांति उत्सव का।
10 अगस्त 1942 को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उमाशंकर सोनार के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन का आगाज हुआ था। बलिया ने देश से पांच वर्ष पहले ही आजादी छीनकर स्वराज सरकार बना ली थी। इसके उपलक्ष्य में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कल्याण परिषद के मंत्री शिव कुमार सिंह कौशिकेय के नेतृत्व में मंगलवार को अगस्त कांति उत्सव का शुभारंभ हुआ। बलिदान और बगावत की परंपरा का जुलूस शहीद पार्क से सेनानी उमाशंकर स्मारक, रेलवे स्टेशन होते हुए सेनानी चित्तू पांडेय स्मारक पर पहुंचा। संस्थान के कलाकारों गीतों एवं लघु नाटकों की प्रस्तुति दी। महेंद्र सिंह, विजय बहादुर सिंह, योगेंद्र प्रसाद गुप्त, सर्वदमन जायसवाल, अभय सिंह कुशवाहा, छोटेलाल, आशुतोष, पुनीत, बृजेश, अजीत, सुमंत, सलोनी, ज्योति, विशाल, अर्जुन, मृत्युंजय, पंकज आदि रहे। वहीं, गड़वार ब्लॉक के ड्वाकरा हाल में शहीदों को नमन किया गया। राज्यमंत्री उपेंद्र तिवारी ने शहीद स्मारक पर दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्प अर्पित किया। शकील अहमद के निधन पर शोक जताया।