बलिया। जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में मारपीट सहित अन्य मामले में मेडिकोलीगल बनवाने के लिए पीड़ित भटक रहे हैं। एक सप्ताह पूर्व रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर संदीप कुमार ने खराब स्वास्थ्य का हवाला दे वीआरएस के लिए सीएमओ को आवेदन भेज दिया है।
रेडियोलाॅजिस्ट के अभाव में मारपीट, पॉक्सो एक्ट सहित अन्य मामलों में मेडिकोलीगल के लिए पीड़ितों को मऊ या आजमगढ़ का चक्कर लगाना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड भी बंद है। एक दिन में मेडिकोलीगल नहीं बन पा रहा है। सके इसके कारण पुलिस पर विवेचनाओं का बोझ बढ़ता जा रहा है।
जिला अस्पताल में तैनात रेडियोलाॅजिस्ट की मौत के सात माह बाद डॉ.संदीप यादव ने चार्ज लिया तो लोगों को लगा कि अल्ट्रासाउंड व मेडिकोलीगल के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, लेकिन यह खुशी एक पखवाड़ा भी नहीं रह पाई। रेडियोलाॅजिस्ट डॉ. संदीप कुमार खराब स्वास्थ्य के कारण वीआरएस का आवेदन देकर घर चले गए हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो उनका घर इटावा की तरफ है। ज्यादा दूरी होने के कारण वह ट्रांसफर के लिए दबाव बना रहे हैं।
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मारपीट व दुष्कर्म में मेडिकोलीगल जरूरी
मारपीट के मामले में लोगों की चोटों का पता लगाने के लिए पुलिस चिकित्सकीय परीक्षण कराती है। इसमें हड्डी टूटने, अंदरूनी चोट व दुष्कर्म के मामले में पीड़िता की सही उम्र का पता लगाने के लिए एक्सरे व अन्य जांच की जाती है। उसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस गंभीर धाराओं का प्रयोग करके आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करती है। समय से मेडिकोलीगल रिपोर्ट न मिलना पीड़ित के साथ ही पुलिस के लिए भी परेशानी का कारण बन जाता है।
शासन से रेडियोलॉजिस्ट की मांग पर कुछ दिन पूर्व नई तैनाती हुई थी। लेकिन वह वीआरएस का आवेदन देकर चले गए हैं। प्रदेश में रेडियोलाॅजिस्ट की कमी है। मेडिकोलीगल न बनने की शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई है। इसके लिए लोगों को मऊ भेजा जा रहा है। - डॉ. विजयपति द्विवेदी, मुख्य चिकित्साधिकारी।