बलिया। दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की योजना के तहत जिले के हजारों पशुपालकों को अपने पशुओं का रखरखाव आसान हो जाएगा और दुग्ध उत्पादन बढ़ने से आय में भी वृद्धि होगी। इसके लिए पशुपालन विभाग अन्य विभागों के समन्वय और सहयोग पशुपालकों को बैंकों से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जारी कराएगा। केसीसी बनाने के लिए ब्लॉक स्तर पर विशेष शिविरों की शुरुआत चुकी है और पिछले दिनों आयोजित शिविरों में करीब 600 पशुपालकों के आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार शासन से जनपद के आठ हजार पशुपालकों को केसीसी जारी करने केसीसी बनाने के लिए ब्लॉक स्तर पर विशेष शिविरों की शुरुआत का लक्ष्य दिया है।
जिले में लगभग चार लाख किसान हैं। किसानों समेत तमाम भूमिहीन ग्रामीणों ने दुग्ध उत्पादन से आजीविका कमाने के लिए करीब 6.5 लाख गोवंशीय व महिषवंशीय(भैंस प्रजाति) पशु पाल रखे हैं। कम जोत वाले लघु-सीमांत श्रेणी के अधिकांश किसानों के आर्थिक संसाधन सीमित होने के कारण फसली और घर-गृहस्थी की जरूरतें पूरी करना उनकी प्राथमिकता होती है। इस कारण वह पशुओं के चारा, रखरखाव आदि की बेहतर व्यवस्था नहीं कर पाते। उनकी इसी दिक्कत को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने सामान्य भूमिहीनों, बटाईदारों और ठेका पर खेती करने वाले किसानों की तरह पशु पालने वाले को पशुपालकों को भी केसीसी जारी करने का निर्णय किया है।
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शिविरों में मौजूद अधिकारी लेंगे आवेदन
केसीसी के लिए आवेदन लेने को पशुपालन विभाग के ब्लॉक स्तर पर लगने वाले शिविरों में विभागीय अधिकारियों के साथ अग्रणी बैंक अधिकारी, सहायक निदेशक मत्स्य और दुग्ध विकास अधिकारी मौजूद रहेंगे। इस बाबत प्रत्येक शुक्रवार को दिन में 11 बजे से ब्लॉक मुख्यालयों पर शिविर लगाया जा रहा है। इसके अलावा पशुपालक किसी भी कार्य दिवस में केसीसी के लिए ब्लॉक में आवेदन कर सकते है। इसके अतिरिक्त 15 से 30 दिसंबर तक न्याय पंचायत स्तर पर आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु आरोग्य शिविर में भी पशुपालकों का केसीसी बनाया जाएगा।
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1.60 लाख रुपये तक बगैर गारंटर के बनेगा केसीसी
योजना के तहत 1.60 लाख रुपये तक ऋण सीमा वाले केसीसी बिना किसी गारंटर के जारी करने के निर्देश दिए हैं। इससे अधिक ऋण सीमा वाले केसीसी पाने के इच्छुकों को ऐसे गारंटर जुटाने होंगे, जिनका अतीत में केसीसी से लेन-देन विवाद रहित रहा हो और उनकी माली हैसियत भी हो। अधिक ऋण सीमा वाले केसीसी की आवश्यकता उन पशुपालकों को हो सकती है, जिन्होंने सीमित पूंजी के बावजूद कोई बड़ा डेयरी प्रोजेक्ट लगाया हो, अथवा कृषि कार्य के लिए अधिक संख्या में पशुपाल रखे हों।
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योजना के तहत पशुपालक अपने पशुओं की देखभाल को जरूरी संसाधन आसानी से जुटा सकेंगे। योजना की विशेषता यह भी है कि यदि किसी किसान को कृषि कार्य के लिए पहले से केसीसी जारी हो चुका है तो उसे आवेदन करने पर पशुपालन मद में दूसरा केसीसी जारी किया जाएगा। योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालकों को केसीसी शिविर में अधिकारियों के समक्ष अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक और पशुपालन व्यवसाय से जुड़े होने का साक्ष्य प्रस्तुत करना होगा।
--डॉ. अशोक कुमार मिश्रा, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी, बलिया।
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