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रोडवेज बस स्टैंड से घर जाने को नहीं मिल रहा साधन

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गैर प्रांतों में फंसे श्रमिकों का गृह जनपद आना निरंतर जारी है। जिला मुख्यालय रोज हजारों कामगार पहुंच रहे हैं। इसमें ट्रेन से पहुंच रहे कामगारों को तो बस से उनके गृह जनपद पहुंचाया जा रहा है, लेकिन राज्य परिवहन निगम की बसों से आने वालों को बस स्टैंड पर ही छोड़ दिया जा रहा है। इससे उन्हें घर पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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सरकार के लाख प्रयास के बाद भी कामगारों की पैदल यात्रा जारी है। राज्य परिवहन निगम की बसों से आने वाले यात्रियों को रोडवेज पर ही छोड़ दिया जा रहा है। उन्हें आगे की यात्रा का कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा है। फिर उनकी शुरू हो जा रही थकान भरी पैदल यात्रा। निजी साधनों के अभाव में अधिकतर यात्री रोडवेज पर ही फंस जा रहे हैं। किसी को कभी-कभार साधन मिल भी जा रहे हैं तो मनमाना किराया वसूला जा रहा है। ऐसे में श्रमिकों की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। सरकार ने घोषणा की है कि कोई भी श्रमिक पैदल न चले। बार्डर पर रोककर उन्हें साधन मुहैया कराया जाय। लेकिन ऐसा धरातल पर होता नहीं दिख रहा है।
भाड़े की गाड़ी से पहुंचे घर
मनियर निवासी नमोनारायण और कृष्णा ने बताया कि वे गुजरात प्रांत के अहमदाबाद से ट्रेन द्वारा बुधवार को गोरखपुर पहुंचे। जिसमें उन्हें प्रति व्यक्ति 625 रुपया ट्रेन का किराया देना पड़ा। गोरखपुर से रोडवेज बस से बलिया पहुंचे। जिसका पैसा नहीं देना पड़ा। बताया कि हम लोग बुधवार की सुबह करीब नौ बजे रोडवेज बस स्टैंड पहुंच गए थे। वहां से मनियर घर जाने के लिए कोई साधन नहीं मिला। निजी वाहन भी उपलब्ध नहीं थे। सरकारी वाहन भी मुहैया नहीं कराया गया। आखिरकार बड़ी मशक्कत के बाद उन्हें एक भाड़े की गाड़ी मिल गई। जिसमें वाहन स्वामी ने मनमाना किराया लिया।
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कूड़े के ढेर में पानी की टोटियां, नहीं निकल रहा पानी
बलिया। रोडवेज बस स्टैंड पर निस्तारण के अभाव में जहां-तहां कूड़े का ढेर लगा हुआ है। यात्रियों की लापरवाही से परिसर में कूड़ा बिखरा पड़ रहा है। रोडवेज परिसर स्थित टोटियों में पानी नहीं आ रहा है। वहां बने चैंबर में कूड़े का अंबार लगा हुआ है।
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