बलिया। महर्षि भृगु ने सरयु नदी की जलधारा को अयोध्या से अपने शिष्य दर्दर मुनि के द्वारा बलिया में मिलाया था। इन्हीं के नाम पर ऐतिहासिक ददरी मेले का आयोजन हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन शुरू होता है। प्राचीन मेले की परम्परा के मुताबिक पहले नन्दी ग्राम मेले का आयोजन होता है। मुगल सम्राट अकबर ने पौराणिक मेले में मनोरंजन के लिए मीना बाजार शुरु कराया था। 1302 में बख्तियार खिलजी ने अंगदेश (वर्तमान बिहार) को काटकर वर्तमान बलिया बनाया।
यह भृगु क्षेत्र अकबर और औरंगजेब के शासनकाल 1707 तक ऐसे ही उनके जागीरदार लोगों के अधीन रहा। मेले की व्यवस्था संत करते रहे। 1739 से 1764 तक इसे काशी के राजा बलवन्त सिंह का संरक्षण मिला। 1798 में जब गाजीपुर जिला बनाया गया तब बलिया तहसील बनाया गया। उसी समय से कार्तिक पूर्णिमा का स्नान और ददरी मेले का प्रबन्ध गाजीपुर के जिलाधीश के निर्देशन में परगनाधिकारी बलिया ने किया। एक नवम्बर 1879 में जब बलिया को जिला बनाया गया तब से व्यवस्था जिला प्रशासन व नगर पालिका कर रहा है।