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जिले में घटे एड्स के मरीज, सावधानी और जागरूकता ही बचाव का उपाय

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बलिया। एड्स से बचने का एक मात्र उपाय सावधानी और सर्तकता है। लोगों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जागरूकता अभियान और गोष्ठियों का आयोजन किया जाता रहा है। हालांकि 2019 में 358 की तुलना में इस वर्ष 240 मरीज मिले हैं जो राहत की बात है।
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अबतक जिलें में करीब 2985 एड्स रोगी चिह्नित किए जा चुकें है। जबकि 30545 लोगों की काउंसलिंग की गई है। एचआईवी/एड्स से ग्रसित लोगों की मदद करने के लिये धन जुटाना, लोगों में एड्स को रोकने के लिये जन-जागरूकता फैलाना और एड्स से जुड़े मिथक को दूर करते हुए लोगों को शिक्षित करने के उद्देश्य से विश्व एड्स दिवस की शुरूआत 01 दिसंबर 1988 को की गयी। तभी से प्रति वर्ष एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। एड्स यानी एक्वायर्ड एम्यूनों डेफिशियेंसी सिंड्रोम एक ऐसी बिमारी है जो एक रोगी से दूसरे रोगी में फैलकर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता नष्ट कर देती है। एचआईवी वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद भी 15-20 सालों तक मरीज स्वस्थ दिखता है लेकिन उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाती है।
क्या कहते है आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग से मिले आकंड़ो के अनुसार जिले में 2002 से अब तक 2985 एचआईवी के मामले सामने आ चुके है। जबकि पिछले वर्ष यह आकंड़ा 2745 था। वहीं इस वर्ष जनवरी से अब तक लगभग 30545 लोगों की काउंसलिंग एवं 30025 लोगों की जांच की गयी, जिसमें 240 नए एचआईवी से पीड़ित मरीज मिले हैं। जबकि वर्ष 2019 में 27448 लोगों की काउंसलिंग और 27428 लोगों की जांच की गई थी, जिनमें 358 संक्रमित पाये गये थे।
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जिला अस्पताल में गोष्ठी आज
जिला एचआईवी/एड्स रोग अधिकारी डॉ. आनंद ने बताया कि विश्व एड्स दिवस के दिन अपराह्न एक बजे गोष्ठी का आयोजन जिला क्षय रोग नियत्रंण केन्द्र पर किया जायेगा। इसके अलावा रेलवे स्टेशन शिविर का आयोजन किया जायेगा। जिसमें लोगों को एड्स से बचाव के लिए जागरुक किया जायेगा।
सावधानी और सतर्कता ही बचाव
जिला एचआईवी/एड्स रोग अधिकारी डा. आनंद ने बताया कि एड्स का एक मात्र इलाज है बचाव। ‘सावधानी हटी दुर्घटना घटी’ यह शब्द एड्स के लिये बिल्कुल सही साबित होती है। असुरक्षित संबंध बनाने से यह बीमारी और भी तेजी से फैल रही है। यह बीमारी संक्रमित खून या संक्रमित इंजेक्शन लगाने से भी फैलता है।
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