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बीते 10 सालों में प्रतिवर्ष औसत एक फीसदी बढ़ी साक्षरता

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बलिया। निरक्षरता का नामोनिशान मिटाने के लिए आठ सितंबर को साक्षरता दिवस मनाया जाएगा। जिले में साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए सरकारी और निजी स्तर पर कई तरह के प्रयास भी किए जाते हैं। इसका असर भी दिख रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मानें तो बीते 10 सालों में औसत एक फीसदी सालाना की दर से बढ़ी है। महिलाओं में भी शिक्षा को लेकर काफी जागरुकता आई है। हालांकि सही आंकड़ा नई जनगणना के बाद ही सामने आएगा।
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विश्व में शिक्षा के महत्व को दर्शाने और निरक्षरता को समाप्त करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष आठ सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस के रूप मे मनाया जाता है। देश में प्रत्येक 10 साल पर होने वाली जनगणना में साक्षरता को शामिल किया जाता है और जनगणना सामने आने के बाद पूरी तस्वीर साफ होती है। साक्षरता दिवस पर कहीं पर समारोह का आयोजन किया जाता है तो कहीं गरीब बस्तियों में जाकर शिक्षा का अलख जगाने का प्रयास किया जाता है। कहीं केवल साक्षरता और निरक्षरता के आंकड़ों की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करने का काम किया जाता है। अधिकारियों की मानें तो साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए करीब एक दशक पहले तक साक्षरता मिशन के तहत पौढ़ शिक्षा योजना का संचालन किया जाता था। इसमें 15 साल से अधिक निरक्षर महिला व पुरुष को साक्षर बनाने का काम किया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ ब्रजेश मिश्र ने बताया कि बीते 10 सालों में जिले में औसत एक फीसद साक्षरता दर बढ़ी है लेकिन इसका सही आंकड़ा जनगणना होने के बाद ही सामने आएगा। बताया कि वर्तमान में जिले में महिलाओं की साक्षरता 80-85 व पुरुषों की साक्षरता 85-90 फीसद के करीब है। डीआईओएस ने बताया कि साक्षरता दर बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित हैं। इसमें प्रमुख रुप से बच्चों को शिक्षित करना मुख्य है।
10 साल पहले रही कुल 76.2 फीसद साक्षरता
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले में कुल साक्षरता दर 76.2 फीसदी रही। इसमें महिला की साक्षरता दर 70.9 फीसद व पुरुष की साक्षरता दर 81.5 फीसद रही। इसके बाद साक्षरता दर को बढ़ाने के लिए तरह के तरह के उपाय होते रहे।
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देश के प्रत्येक नर-नारी को साक्षर बनाने के सतत प्रयासों के बावजूद अब तक अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी है। मेरा मानना है कि जब तक इस अभियान में मिशनरी की तरह सेवानिवृत्त शिक्षक, समाजसेवी तथा रंगकर्मी अपने-अपने ढंग से योगदान नहीं करेंगे, अपेक्षित एवं त्वरित प्रगति नहीं हासिल की जा सकती है। केवल आंगनबाड़ी जैसी संस्थाओं के बलबूते वंचित और उदासीन तबके को साक्षर, शिक्षित व जागरूक बनाना टेढ़ी खीर है। - डॉ शशि प्रेमदेव, शिक्षक व कवि
अधिक से अधिक लोग साक्षर हों इसके लिए प्राथमिक स्तर से प्रयास करने होंगे। हर बच्चे की रुचि पढ़ाई लिखाई की तरफ जगानी होगी, व्यक्तिगत रूप से समय दे कर सिखाना होगा। यदि ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर नुक्कड़ नाटक कराए जाएं तथा आसपास के पढ़े लिखे लोगों को प्रेरित किया जाए कि अपनी तरफ से किसी एक को साक्षर करें और वह साक्षर व्यक्ति किन्हीं दो को साक्षर कर सके तो एक श्रृंखला चल पड़ेगी। - डॉ कादम्बिनी सिंह, शिक्षिका व साहित्यकार।
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