जहां गंगा के जलस्तर घटने से गंगा के किनारे बसे गांव के लोगों ने राहत महसूस कर रहे थे। वहीं रविवार की देररात सोहरा कटान ने गंगापुर बुढिय़ा माई मंदिर के समीप तबाही मचानी शुरू कर दी। और देखते ही देखते दो बीघा जमीन अपने पेेटे में समाहित कर ली और लोगों के घरों को अपना निशाना बनाने को आतुर हो गई।
विभागीय उदासीनता का आलम यह है कि कटान स्थल व एनएच-31 के बीच की दूरी मात्र 70 मीटर ही शेष बचा है। लेकिन आज तक बाढ़ विभाग के अधिकारियों ने कोई सुधि नहीं ली। इसको लेकर गंगापुर से लेकर लाला बगीचे तक हड़कंप की स्थिति बनी रही और लोग अपने घरौंदे को तोडने युद्धस्तर पर जुट गए हैं।
करीब एक माह से गंगा का जलस्तर इन गांवों को घेर कर रखा था और पानी अंदर ही अंदर कटान करते हुए बस्ती के अंदर आ गया। जिसके चलते गंगापुर निवासी शिवमुनि राम, अनिल राम, रामकुमार, सुनील, कृष्णकांत, रामरूप शर्मा, श्रीकिशुन राम, बदारी राम, परशुराम राम, पचतौरी, तेतरी देवी, नकूल वर्मा अपने घरों को तोड़ना शुरू कर दिया है।
अगर इसी तरह सोहरा कटान बना रहा तो दो दिनों के अंदर पूरी बस्ती गंगा में समाहित हो जाएगी। आज तक गांव गिरते गए, बंधा टूटता गया। लेकिन बाढ़ विभाग अपने हरकतों से बाज नहीं आया। हर साल केवल फ्लड फाइटिंग के नाम पर लूट की छूट में लगा रहा। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर 56.47 मीटर दर्ज की गई। साथ ही प्रति घंटा एक सेमी का घटाव बना हुआ है।
गंगा के कटान से बेघर होकर लोगों के सामने यह यक्ष प्रश्र बना हुआ है कि आखिर अब जाय तो कहां जाय। बाढ़ के समय में जिला प्रशासन से लेकर विभाग तक केवल सड़कों पर नजर आया। लेकिन जलस्तर गिरने के बाद किसी भी अधिकारी का अता-पता नहीं चल रहा है। एक तो पहले से ही पचरूखिया से लेकर दयाछपरा तक लोग अपनी झुग्गी-झोपड़ी लगाए हुए हैं। ऐसे में जाय तो कहां जाय।