सिकंदरपुर/ बांसडीह रोड। मनियर-सिकंदरपुर मार्ग पर बृहस्पतिवार की सुबह गोरखपुर जा रही सवारियों से भरी जीप निपनिया पेट्रोल पंप के समीप साइकिल सवार किशोर को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर पलट गई। चालक हरेराम गोंड (50) निवासी पिपरपाती की मौत हो गई, चार यात्री घायल हो गए। आसपास के लोगों ने यात्रियों को बाहर निकालकर सीएचसी सिकंदरपुर भेजा।
बांसडीहरोड थाना के पिपरपाती गांव निवासी हरेराम गोंड जीप चलाते थे। प्रतिदिन की भांति बांसडीह से सवारी बैठाकर मनियर होकर सिकंदरपुर कस्बा की तरफ जा रहे थे। निपनिया नई बस्ती के पास पेट्रोल पंप के समीप साइकिल सवार लड़के को बचाने के दौरान जीप अनियंत्रित होकर पलट गई। 10 मीटर घसीटने के बाद रुकी, जिसमें चालक घायल हो गए। आसपास के लोगों ने जीप में फंसी सवारियों को बाहर निकाला। घायलों को सीएचसी पहुंचाया, जहां चिकित्सक ने चालक की हालत गंभीर देख जिला अस्पताल को रेफर कर दिया। वहीं, यात्रियों की मरहम पट्टी करने के बाद छुट्टी कर दी गई। जिला अस्पताल में चिकित्सक ने चालक को मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना पर पोस्टमार्टम हाउस पर परिजन गाड़ी मालिक व जान पहचान वालों की भीड़ मौजूद रही। पत्नी गीता देवी का बेसुध जैसा रहा। चालक के दो बेटे भोलू 14 वर्ष व सोलू 12 वर्ष और 21 वर्षीय बेटी पिता को याद कर धाड़े मारकर रहे रो रही थी। जिस साइकिल सवार बालक को बचाने की कोशिश की गई, वह सुरक्षित है। सिकंदरपुर थाना प्रभारी प्रवीण सिंह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद विधिक कार्रवाई की जाएगी।
बेटी की शादी व बेटे के आगे की पढ़ाई की हसरत रही गई अधूरी : हरेराम गोंड लंबे समय से बभनौली निवासी मार्केंडेय की फोर्स जीप चलाते थे। बांसडीह से रोज सुबह गोरखपुर व गोरखपुर से शाम को बांसडीह चलती थी। साइकिल सवार किशोर को बचाने के दौरान असमय मौत से परिवार पर आफत टूट गई है। हरेराम की तीन संतान में बड़ी बेटी अर्चना इंटर की छात्रा है। उसकी शादी के लिए कुछ दिनों से वर खोज रहे थे। पिता की मौत से बेटी की शादी की हसरत अधूरी रह गई। वहीं, दो बेटे 15 वर्षीय भोलू हाईस्कूल व 12 वर्ष का सोलू कक्षा आठ का छात्र था। पिता के मौत से परिवार की पूरी जिम्मेदारी दोनों के कंधे पर आ गई। भोलू पढ़ने में अच्छा था, वह पढ़ लिखकर अधिकारी बनना चाह रहा था। सिर से पिता का छाया उठने से उसकी हसरत अधूरी रह गई है। पिता की मौत से तीन भाई बहनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। बेटी अर्चना बार-बार पिता को पुकारती हुई बेहोश हो जा रही थी। मां बेटी की हालत देख सांत्वना देने वालों को समझ में नहीं आ रहा था कि कोई कैसे समझाएं।