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बलिया में गोरखधंधा : हर तरफ अवैध खनन, पुलिस रिकॉर्ड में रामराज, सांठगांव के दम पर मौज में है माफिया

Tue, 19 Apr 2022 05:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा सूरज शुक्ला, बलिया

सार

बलिया में अवैध खनन का अला है कि छह माह में किसी भी माफिया पर एक भी केस दर्ज नहीं हुआ जबकि यह जिला अवैध खनन और लाल बालू के धंधे का गढ़ है।
 
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अवैध खनन... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिला अवैध खनन और लाल बालू के धंधे का गढ़ है। इसके बावजूद पिछले छह माह में अवैध खनन संबंधी एक भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस-प्रशासन के रिकॉर्ड में रामराज जारी है। खानापूर्ति करने के लिए जरूर एक-दो वाहन जब्त कर दिखावे की कार्रवाई की गई। ये भी महज इसलिए, ताकि माफिया तक आंच न पहुंचे।

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दरअसल, सीज की गई गाड़ियों को तो गाड़ी मालिक जुर्माना भरकर छुड़ा लेता है। अगर केस दर्ज कर विवेचना हो, तो ही माफिया जद में आएंगे। खनन विभाग भी सो रहा है। प्रशासन भी संज्ञान लेकर केस दर्ज करवा सकता है, लेकिन वह ऐसा नहीं करता, क्योंकि पूरा खेल ही उनकी जानकारी व संरक्षण में हो रहा है। 

जिसने किया विरोध उसे हुआ नुकसान, इसलिए सब खामोश :
खनन माफिया का खौफ तमाम ग्रामीणों के दिल और दिमाग में कैद है। ऐसे कई लोगों से बातचीत की। जिन्होंने खनन माफिया के खौफ की दास्तां बताई। अधिकतर लोग बोलने को तैयार नहीं हुए। उनका यही कहना था कि ये सब कई वर्षों से होता चला आ रहा है। इसके खिलाफ बोलने का मतलब है खुद को नुकसान पहुंचाना।
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24 घंटे में निकलते सैकड़ों वाहन, बीमारी से हो गया हूं त्रस्त...
अठगंवा गांव निवासी एक शख्स ने अमर उजाला की टीम से बातचीत की। उन्होंने बताया कि उनके गांव से 24 घंटे में सैकड़ों खनन वाली गाड़ियां निकलती हैं। सड़कें ध्वस्त हो चुकी हैं और हर समय धूल ही धूल रहती है। इस वजह से उनकी पत्नी व मां अस्थमा की बीमारी से ग्रसित हो गई हैं। कई बार शिकायतें की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस को जानकारी रहती है। इसलिए शिकायत का फर्क नहीं पड़ता है।

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पीयूसीएल और ग्रामीण चौकीदार संघ ने पत्रकारों को दिया समर्थन

पेपर लीक मामले में गिरफ्तार पत्रकारों की रिहाई की मांग को लेकर संयुक्त पत्रकार संघर्ष मोर्चा के बैनर तले जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में पत्रकारों का क्रमिक अनशन सोमवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। मौके पर पहुंचे रसड़ा तहसील के पत्रकारों ने पत्रकारों की रिहाई तथा डीएम व एसपी के निलंबन की मांग की।

पत्रकार संतोष कुमार सिंह ने कहा कि सच उजागर करने वाले चौथे स्तंभ को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि कोई अन्याय के खिलाफ आवाज न उठाए। पर यह बागी बलिया है। यहां से निकली चिंगारी ज्वालामुखी बन जाती है। निर्दोष पत्रकारों को फर्जी तरीके से फंसाकर प्रशासन अपनी करतूतों पर पर्दा डालने में लगा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीयूसीएल के सदस्य व अधिवक्ता रणजीत सिंह ने कहा कि बलिया के प्रशासन को सही व गलत का फर्क नहीं मालूम। पत्रकारों की लड़ाई को पीयूसीएल समर्थन करता है। संवाद 
 
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