बलिया। जिले के 34 राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षकों के अभाव में शिक्षा व्यवस्था बेपटरी है। इन स्कूलों में सृजित 413 पदों के सापेक्ष महज 170 अध्यापक ही तैनात हैं। जबकि 243 पद रिक्त हैं। इन स्कूलों में पंजीकृत 5452 छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए मुख्य विषयों गणित और विज्ञान के ही शिक्षक नहीं हैं। ऐसे में पठन-पाठन का कार्य प्रभावित है।
शासन ने लाखों रुपये खर्च कर जिले में राजकीय स्कूलों के भवन तो खड़े कर दिए। लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति करना भूल गया। जिले में 34 राजकीय विद्यालय हैं। इनमें 5452 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। मगर ऐसा कोई स्कूल नहीं है, जिसमें शिक्षकों की संख्या पूरी हो। यहां तक कि विद्यालयों में प्रधानाचार्य के पद भी पूरे नहीं भरे हैं। सिर्फ तीन विद्यालयों में प्रधानाचार्य तैनात हैं। अन्य नौ में प्रभार शिक्षकों के पास हैं। वहीं प्रधानाध्यापक के नौ के सापेक्ष छह और प्रधानाध्यापिका के 13 के सापेक्ष आठ पद रिक्त हैं। प्रवक्ताओं की बात करें तो जिले में 101 प्रवक्ताओं को जरूरत है। लेकिन विद्यालयों में सिर्फ 18 प्रवक्ता तैनात हैं। शेष 83 पद रिक्त हैं। सहायक अध्यापक 278 के सापेक्ष सिर्फ 141 तैनात हैं। 137 सहायक अध्यापकों के पद खाली हैं। इनमें प्रमुख विषयों के ही शिक्षकों का अभाव है। जिससे राजकीय स्कूलों में छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा मुहैया नहीं हो पा रही है।
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वर्षों से मुख्य विषय के शिक्षक नहीं
राजकीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, जबकि इनमें छात्र-छात्राओं की संख्या ठीक है। आलम यह है कि पिछले कई साल से मुख्य विषय गणित और विज्ञान तक के शिक्षक ही नहीं हैं। शिक्षक न होने से छात्र-छात्राओं को हिंदी, गणित, अंग्रेजी, विज्ञान, सामाजिक विषय एवं कला जैसे मुख्य विषयों की पढ़ाई कराना किसी चुनौती से कम नहीं है।
40 छात्र पर एक शिक्षक की तैनाती का है प्रावधान
शासन द्वारा राजकीय विद्यालयों में 40 छात्रों पर एक शिक्षक की तैनाती का प्रावधान है। लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों काे जुगाड़ के सहारे शिक्षा दी जा रही हैं।