बलिया। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में सोमवार को भाषा महोत्सव का आयोजन हुआ। इस अवसर पर ‘बहुभाषिकता और भारतीय संस्कृति’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसके मुख्य वक्ता प्रो. यसवंत सिंह ने कहा कि भाषा, भाषा के पार जाना सिखाती है। भाषा हमारी संस्कृति का धागा है, जितनी बोलिया है उस माला के फूल हैं। भाषा के पार एक व्यक्तित्व होता है। भाषा हमारी सांस्कृतिक पहचान होती है। संस्कृति व्यक्ति को जोड़ती है। कबीर जिस भाषा में बात करते थे वह सधुक्कड़ी है। उन्होंने कहा कि कबीर की भाषा सांस्कृतिक भाषा है। विशिष्ट वक्ता प्रो. अजय बिहारी पाठक ने कहा कि दमनकारी उपनिवेश के बाद भी हमारे देश में अनेक भाषाएं हैं।
अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. फूलबदन सिंह ने कहा कि भौतिकता की चकाचौंध में न रहे। आज न संवेदना है ना ही संवाद है। भौतिकता दोनों को नष्ट कर रही है। धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग के प्रभारी डॉ. संदीप यादव ने किया। संचालन हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ.अभिषेक मिश्र ने किया। इस अवसर पर शैक्षणिक निदेशक डॉ. पुष्पा मिश्रा, डॉ. प्रवीण नाथ यादव, डॉ. प्रमोद शंकर पांडेय, डॉ. शैलेन्द्र सिंह, डॉ. हर्ष त्रिपाठी एवं विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।