दीवानी न्यायालय परिसर में हिंदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ करते कर?
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बलिया। हिंदी दिवस के मौके पर सोमवार को पूरे जिले में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों ने हिंदी के उत्थान को लेकर अपने-अपने विचार रखे। रामपुर स्थित पंडित केपी मिश्रा मेमोरियल संगीत विद्यालय के कार्यालय में हिंदी दिवस पर आयोजित गोष्ठी में अतीत मिश्रा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अध्यक्षता करते हुए राजकुमार शास्त्री ने हिंदी के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुए भक्ति गीत ‘मोरे नैया में लक्ष्मण राम, गंगा मैया धीरे चलो’ पेश किया। मीनाक्षी ने हिंदी के प्रति ईमानदारी से कार्य करने पर जोर दिया तो डॉ. नवचंद्र तिवारी ने सुनाया ‘जन-जन की पहचान है हिंदी, सारा हिंदुस्तान है हिंदी, मीरा, तुलसी, सूर, प्रेमचंद, कबीरा और रसखान है हिंदी’। भोजपुरी भूषण नंद जी नंदा ने जंगे आजादी वाले सूरमा क्रांतिकारी सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई दी। वंदना मिश्रा ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और यह हमें कभी गरीब नहीं बना सकती।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि हिंदी को राजभाषा नहीं बल्कि राष्ट्रभाषा बनाने की जरूरत है। सात समंदर पार भी यह विस्तार से राज कर रही है। रश्मि पाल ने सजा दो घर को गुलशन में मेरे सरकार आए हैं को सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। फतेहचंद बैचन ने हिंदी हिंद की भाषा है, हमें इसका विकास चाहिए सुनाकर हिंदी के प्रति सब में जज्बा भरा। गोष्ठी में वत्सल तिवारी, अजीत कुमार राय, अंबुज ओझा, मनमोहन चौहा, अरुण राय, गिरिजेश, विपुल आदि थे। संचालन डॉ. नवचंद्र तिवारी ने किया। संस्था के मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय ने सब के प्रति आभार व्यक्त किया। घोघा : हिंदी भाषा को देवनागरी लिपि में भारत की कार्यकारी और राजभाषा का दर्जा आधिकारिक रूप में दिया गया। गांधी ने हिंदी भाषा को जनमानस की भाषा भी कहा है। यह बातें हिंदी दिवस के मौके पर भारतीय जीवन बीमा निगम बांसडीह के शाखा प्रबंधक रामप्रवेश राम ने रविवार को कही। हिंदी पूरी दुनिया में सबसे अधिक बोली जानें वाली मूल भाषा है। कहा कि वर्ष 1918 में गांधी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था और 14 सितंबर 1949 के दिन संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिंदी भारत की राजभाषा होगी। हिंदी पखवाड़ा दिवस के उद्घाटन पर मुख्य रूप से सहायक शाखा प्रबंधक राजेश यादव, श्यामा चरण शुक्ल, जयप्रकाश पाल, शत्रुघ्न सिंह, अनुरुद्ध सिंह, सीताराम सिंह, मुद्रिका प्रसाद, नारायण जी, विक्रम सिंह, ओमशंकर, वेदरत्न वाजपेयी, अंकित अग्रवाल, विकास पटेल आदि रहे। संचालन सहायक उमाशंकर यादव ने किया।