बलिया। हार्ट अटैक के मरीजों की जान बचाने के लिए सरकारी अस्पताल में तत्काल इलाज की सुविधा मिलेगी। हार्ट अटैक से किसी की मौत ना हो, इसके लिए जिला अस्पताल से लगायत सीएचसी-पीएचसी पर बेड, दवा व ईसीजी जांच की सुविधा उपलब्ध होगी। स्वास्थ्य केंद्र से जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए पांच बेड का वेंटिलेटर युक्त बेड का वार्ड बनाया जा रहा है।
जनपद में अब तक हृदयघात के मरीजों के इलाज की सुविधा न होने से हर वर्ष 35 से अधिक लोगों की असमय मौत होती है। पोस्टमार्टम न होने के कारण इसकी पुष्टि नहीं हो पाती है। ह्रदयघात के मरीजों को गोल्डन ऑवर में बेहतर इलाज की सुविधा मिले, इस पर जोर दिया जा रहा है। जिले से अस्पताल स्पोक हॉस्पिटल के रूप में काम करेंगे, जहां लक्षणों के आधार पर स्टेमी की प्रारंभिक पहचान और हार्ट अटैक के संभावित मरीजों की पहचान कर जिला स्तरीय अस्पतालों में तत्काल उन्हें भर्ती किया जाएगा। जिला अस्पताल में फिजिशियन डाॅक्टर पंकज झा को इसका नोडल बनाया गया है। बीएचयू में पिछले सप्ताह सीएमओ डॉ. संजीव वर्मन, वेक्टर जिला प्रभारी डॉ. अभिषेक मिश्र, जिला अस्पताल सीएमएस डॉ. एसके यादव व फिजिशियन डॉ. पंकज के अलावा रसड़ा, सीयर, सिकंदरपुर, बैरिया, बांसडीह सहित अन्य सीएचसी पर एक दिवसीय प्रशिक्षण हुआ है। जिला अस्पताल का नोडल डॉ. पंकज झा को बनाया गया है।
सीएचसी से रेफर मरीजों को मिले संसाधन
स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सीएमओ को पत्र जारी कर ह्रदयघात के मरीजों को सीएचसी से रेफर करने के लिए एंबुलेंस सहित तमाम सावधानियां बरते जाने का निर्देश दिया है। गोल्डन ऑवर में मरीजों की जीवन रक्षा के लिए अस्पतालों में पूरा तंत्र विकसित किए जाने का निर्देश दिया है। शासन स्तर से जिला अस्पताल से लगाया सीएचसी-पीएचसी पर 30 हजार कीमत वाले महंगे जीवन रक्षक इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। इससे मरीज को तत्काल राहत मिलेगी।
हृदय रोग विशेषज्ञ की सलाह पर लगेगा जीवन रक्षक इंजेक्शन
शासन के निर्देश पर एक व्हाट्स एप ग्रुप बनाया गया है। इसमें मेडिकल काॅलेज के हृदय रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सक शामिल हैं। अस्पताल में हार्ट अटैक के आने वाले मरीजों की ईसीजी जांच कर चिकित्सक रिपोर्ट व्हाट्सएप ग्रुप में डालेंगे। हृदय रोग विभाग के डाॅक्टर ईसीजी रिपोर्ट देखकर तत्काल सलाह देंगे और जरूरत पड़ने पर मरीज को हायर सेंटर रेफर किया जाएगा या 30 हजार रुपये का जीवन रक्षक इंजेक्शन लगाया जाएगा।
इमरजेंसी में बना हृदयघात स्टेमी वार्ड
जिला अस्पताल की इमरजेंसी व ट्राॅमा सेंटर में वेंटिलेटर लगाया जा रहा हैं। आयुष्मान वार्ड को डेंगू वार्ड के बगल में शिफ्ट कर उसके स्थान पर हृदयघात मरीजों के लिए हृदयघात स्टेमी (एसटी-एलिवेशन मायोकार्डियल इंफार्क्शन) वार्ड बनाया जा रहा है। मरीजों के अस्पताल पहुंचने से लेकर उनके भर्ती होने, जांच, इलाज और हायर सेंटर को रेफर किए जाने तक का पूरा ईको सिस्टम रहेगा। जरूरत पड़ी तो ग्रीन कॉरिडोर बनाकर हायर सेंटर रेफर किया जाएगा।
जिला अस्पताल से लगाय ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों पर हार्ट अटैक के मरीजों को तत्काल इलाज के लिए शासन के निर्देश पर संसाधन बढ़ाए जा रहे हैं। स्पोक हॉस्पिटल के रूप में काम करने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। - डॉ. संजीव वर्मन, सीएमओ।