रामगढ़/दया छपरा/बैरिया। उच्चतम बाढ़ बिंदु के करीब पहुंच चुका गंगा का जलस्तर शनिवार रात को स्थिर होने के बाद रविवार से नीचे आना शुरू हो गया है। जैसे-जैसे जलस्तर नीचे आ रहा है, काटन तेज होता जा रहा है। रविवार को उदय छपरा में तीन और मकान गंगा की लहरों में समा गए। गंगा के रौद्र रूप को देख बाढ़ पीडि़त अपने मकानों को खाली करने में जुटे हैं।
जनपद में शनिवार को गंगा नदी हाईफ्लड लेवल 60.39 से मात्र 14 सेंटीमीटर नीचे तक पहुंच गई थी। इसके बाद से पानी थोड़ी देर तक स्थिर रहने के बाद नीचे उतरना शुरू हो गया है। सोमवार शाम तक गंगा का जलस्तर 59.550 मीटर तक आ गया था। यह खतरे के निशान से अभी तक 1.93 मीटर ऊपर है। पानी तेजी से घटने से कटान का खतरा बढ़ता जा रहा है। रविवार की शाम उदय छपरा के कंठा राम, संतोष राम और परशुराम राम का मकान गंगा की लहरों में समा गया। पूरी अनुसूचित बस्ती में सोमवार को अफरातफरी का माहौल रहा। लोग अपने घरों को खाली करने में जुटे हुए थे। लोगों का कहना है कि गंगा का जलस्तर जब घटता है तो कटान और भी तेज हो जाता है। मदद के नाम पर शासन-प्रशासन सिर्फ आश्वासन दे रहा है। नाव के अभाव में पीडि़तों का समान भी नहीं निकल पा रहा है। गंगा के पानी कहर से प्रतिदिन स्थिति बदतर होती जा रही है। प्लास्टिक के तिरपाल के नीचे जिंदगी गुजर रही है। यह नजारा बदिलपुर से टेंगरही तक के बाढ़ पीडि़तों का है। दो दर्जन गांव राजपुर एकौना, उदवनछपरा, हल्दी भरसौता, बाबू वेल, पोखरा, डांगरबाद, जग छपरा, रामगढ़ सुनार टोला, बनिया टोला, सुघर छपरा, दुबे छपरा, उदय छपरा, गोपालपुर, प्रसाद छपरा आदि टापू बने हुए हैं। जो लोग सड़क पर आ गए हैं, उन्हें तो कुछ राहत है। गंगा में प्रति घंटा तीन सेंटीमीटर का घटाव बना हुआ है।