ताकत का उपयोग ऐसा होना चाहिए कि जनता भय मुक्त होकर चुनाव करें। राजनैतिक दलों का नैतिक पतन हो चुका है। ये नेता नए कार्यकर्ता बनाते हैं। उनके दिमाग में राष्ट्रवाद का जहर घोलते हैं। इन नेताओं ने अपना असली चेहरा पंचायत चुनाव में सामने ला दिया है। पिता की मर्यादा का ख्याल पुत्र नहीं कर पा रहा। धोखाधड़ी के आरोपी के यहां दरबार लगा कर भोजन चख रहा है, जबकि झोपड़ी पर ही कभी दरबार लगता था।