पंदह। मिशन हरियाली के तहत वन विभाग ने कराए गए पौधरोपण को सीएम डैश बोर्ड पर 100 प्रतिशत जीवित दिखाकर अपनी पीठ तो जरूर थपथपा ली। लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। जिन आंकड़ों के दम पर जनपद ने प्रदेश में अव्वल स्थान प्राप्त किया है, उसका सच सिकंदरपुर रेंज के नौ क्षेत्रों में देखा जा सकता है। अधिकतर पौधों का नामोनिशान मिट चुका है।
सीएम डैशबोर्ड पर दिए गए आंकड़े के मुताबिक विभाग द्वारा एक अप्रैल से 31 अक्तूबर तक कुल 40 लाख 65 हजार 46 पौधे रोपित किए गए थे। ये सभी पौधे रिपोर्ट भेजी जाने तक हरे थे। इस आधार पर सोनभद्र, खीरी, जालौन, मिर्जापुर और ललितपुर के साथ ही जनपद ने प्रदेश में प्रथम रैंक हासिल की। लेकिन सघन हरियाली अभियान के तहत लगाए गए लाखों पौधे कहां लगे है यह बताने के लिए विभाग तैयार नहीं है।
विभागीय शिथिलता की वजह से अधिकांश पौधों का वजूद ही समाप्त हो गया है। नजीर के तौर पर सिकंदरपुर रेंज के नौ स्पॉट हैं। यहां के कुल 73 हेक्टेयर भूमि पर लगाए गए 116800 पौधों में से 90 प्रतिशत पौधे सूख चुके हैं। भले ही इन क्षेत्रों को हराभरा करने के लिए सरकार ने 80 लाख रुपये से अधिक की धनराशि खर्च कर दी। विभागीय जिम्मेदारों ने कोरम पूरा कर इन इलाकों को कागजों पर हरित घोषित कर दिया।
जिन इलाकों में पौधरोपण कर विभाग ने अपनी पीठ थपथपाई है, उसमें रामपुर से डंकिनगंज पेट्रोल पंप तक सात हेक्टेयर भूभाग पर लगाए पौधों सहित टंडवा से उससा तक सात हेक्टेयर, लखनापार नहर से गौरा मदनपुरा तक सात हेक्टेयर, मालदह से डूहा बिहरा एवं बंधा संपर्क मार्ग तक आठ हेक्टेयर, नवानगर से मुइया मझवालिया एवं अन्य संपर्क मार्ग तक सात हेक्टेयर, बेलसड़ी से करसी सहित अन्य संपर्क मार्ग तक सात हेक्टेयर, पुर से मेउली तक आठ हेक्टेयर, मेउली से रकसा तक आठ हेक्टेयर और उससा से पुर तक सात हेक्टेयर भी शामिल है। लेकिन विडंबना यह है इनमें से अधिकतर क्षेत्रों में पौधारोपण कराया ही नहीं गया।
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सीएम डैशबोर्ड में जनपद की रैंकिंग अच्छी है। सभी क्षेत्रों में सूखे पौधों की जगह फिर से पौधरोपण कराने का निर्देश दिया गया है। रही बात सिकंदरपुर रेंज के नौ स्पॉट की तो संबंधित रेंजर से जीवित पौधों की संख्या सहित स्पष्टीकरण मांगा गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने की दशा में विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
-विमल कुमार आनंद, डीएफओ, बलिया।