रामगढ़/बेल्थरारोड। तबाही मचाने के बाद अपने पेटे में वापस हुई गंगा के जलस्तर में एक बार फिर से बढ़ाव शुरू हो गया है। इसको देखते ही गंगा के मुहाने पर बसे गांव के लोगों में अफरातफरी का माहौल कायम हो गया है। लोगों का कहना है कि अगर गंगा का जलस्तर बढ़ा तो काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर गुरुवार की शाम चार बजे 55.950 मीटर दर्ज की गई। प्रति घंटा एकसेंटीमीटर का बड़ा बना हुआ है।
वहीं, सरयू नदी के जलस्तर में गत एक पखवारे से उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है। पिछले 24 घंटे से नदी की प्रकृति में स्थिरता आ गई। जलस्तर स्थिर हो जाने से बाढ़ की संभावना फिलहाल टल गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार को अपराह्न 64.63 मीटर पर स्थिर है। हालांकि नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से 62 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। हाहानाला, तुर्तीपार, हल्दीरामपुर रेगुलेटर से पानी का रिसाव हो रहा है। टगुनिया की राजभर बस्ती से सटकर नदी का पानी बह रहा है। तुर्तीपार के माली बस्ती और मल्लाह बस्ती में पानी पहुंच गया है। नदी के जलस्तर में वृद्धि के साथ ही कोइलीमोहान ताल और गौरी ताल घोसा का पानी आसपास के दर्जनों ग्रामों में फैल गया है। खेतों में जलजमाव से फसलों के बर्बाद होने की संभावना बढ़ गई है। नदी का जलस्तर अभी स्थिर है। जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन नदी के मिजाज में अप्रत्याशित परिवर्तन को लेकर तटवर्ती दर्जनों ग्रामों के हजारों लोग सशंकित हैं।