बलिया। बाजारों में जैविक उर्वरक के नाम पर नकली उर्वरक की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। कई इलाकों में तो नकली डीएपी भी बेचे जाने की शिकायत किसान कर रहे हैं। हालांकि तीन सप्ताह पहले कृषि अधिकारी ने सीमावर्ती मऊ जिले के गांव में छापा मारकर नकली डीएपी बनाने की फैक्ट्री पकड़ी थी। इसके बावजूद नकली खाद की बिक्री पर लगाम नहीं लग पा रही है।
वर्तमान में रबी फसलों की बोआई जोरों पर है लेकिन बाजारों में डीएपी की कमी के कारण कुछ दुकानदार जैविक डीएपी के नाम पर नकली खाद बेच रहे हैं। डीएपी की तरह दिखने वाली जैविक डीएपी को लेकर भरौली के किसान रामानंद व सुनील ने बताया कि यह उर्वरक खेतों में डालते ही राख की तरह हो जा रही है। यह भी बताया कि सीमावर्ती गाजीपुर के किसी गांव से लाकर बाजारों में नकली खाद धड़ल्ले से बेची जा रही है। इसकी जांच होनी चाहिए। उधर, तीन सप्ताह पहले जिला कृषि अधिकारी ने सीमावर्ती मऊ जिले के मोहनसराय गांव में छापा मार कर नकली डीएपी बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था। इसमें एक आरोपी भी पकड़ा गया था।
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माह में दूूसरी बार पहुंची 2650 मीट्रिक टन इफ्को डीएपी
बलिया। जिले में एक माह में दूसरी बार 2650 मीट्रिक टन इफ्को डीएपी की खेप रविवार की देर शाम में फेफना रैक प्वाइंट पर पहुंच गई। इस उर्वरक को जिले के कुल 113 सहकारी समितियों पर भेजने का काम भी सोमवार को प्रारंभ हो गया। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार जिले में लक्ष्य के सापेक्ष डीएपी प्राप्त हो चुका है और समितियों पर किसानों को डीएपी का वितरण करने का निर्देश दिया गया है।
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डीएपी के बिक्री की लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। तीन दिनों पहले ही भरौली चौराहे पर बिहार ले जा रहे डीएपी के मामले में कार्रवाई की गई है। जल्द ही छापेेमारी की जाएगी और जैविक डीएपी के नाम पर बेचे जा रहे उर्वरक की सैंपलिंग की जाएगी। जिले में डीएपी की कोई कमी नहीं है। 2650 मीट्रिक टन इफको डीएपी को सहकारी समितियों पर भेजा जा रहा है। - विकेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी, बलिया।