फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महावीर घाट को बनाया डंपिग ग्रांउड

विज्ञापन
विज्ञापन
बलिया। नगरपालिका परिषद की लापरवाही और अनदेखी की वजह से कटहल नाले के माध्यम से शहर की गंदगी गंगा में प्रभावित हो रही है। साथ ही, शहर से निकलने वाले कूड़े को गंगा किनारे खाली स्थानों और महावीर घाट स्थित सड़कों के किनारे गिराया जा रहा है। बाढ़ की स्थिति होने पर यह कचरा पानी के साथ नदी में समा जा रहा है।
विज्ञापन

हालात यह है कि वार्ड नंबर 11 स्थित गंगा के तटवर्ती इलाकों और सड़कों को कचरा घर बना दिया गया है। ऐसे में गंगा के साथ आसपास फैल रहे प्रदूषण से जनजीवन भी व्यापक तौर पर प्रभावित हो रहा है। इससे पैदा होने वाली संक्रामक बीमारियों का शिकार होकर लोग असमय ही काल के गाल में समा रहे हैं।
शहर से करीब प्रतिदिन 50 टन कूड़ा निकलता है। बावजूद इसके, नगरपालिका के पास कूड़ा निस्तारण की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। सफाईकर्मी महावीर घाट के समीप जहां भी खाली स्थान देखते हैं, वहीं कचरा उड़ेल देते हैं। सभासद संजय यादव की ओर से इसका मुखर विरोध किया जाता है। पिछले दिन भी यहां कूड़ा गिरने से रोक दिया गया था। सिटी मजिस्ट्रेट के आश्वासन के बाद भी दबाव बनाकर यहीं पर कूड़ा गिराया जा रहा है। पालिका की ओर से कूड़े का ढेर तो लगाया जा रहा है, लेकिन इसके निस्तारण के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
विज्ञापन

डंपिंग ग्राउंड पर विरोध
शहर से 16 किमी दूर बसंतपुर में कूड़ा निस्तारण केंद्र निर्माणाधीन है। 2006 में नगर से बसंतपुर गांव में नगर पालिका के लिए कचरा निस्तारण केंद्र की आधारशिला रखी गई। इसके निर्माण का जिम्मा सीएंडडीएस को मिला। ए टू जेड कंपनी को टेंडर दिया गया था। दोनों कंपनियों के मध्य विवाद होने के बाद मामला ट्रिब्यूनल में चला गया। अदालत में मामला लंबित होने के कारण कूड़ा निस्तारण केंद्र तैयार नहीं हो सका है।
कचरा निस्तारण केंद्र के विवादित होने से कुछ समस्या उत्पन्न हुई है। हालांकि इसके समाधान के तौर पर डोर टू डोर कचरा कलेक्शन कराया जा रहा है। शासन से निर्देशित पद्धति के आधार पर निस्तारित कराया जा रहा है। कचरा निस्तारण केंद्र का मामला हल होते ही यह समस्या समाप्त हो जाएगी। - दिनेश कुमार विश्वकर्मा, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका परिषद, बलिया
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें