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जिला योजना: इस वर्ष अनुमोदन के सापेक्ष महज 1.18 फीसदी धन हुआ अवमुक्त

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वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिला योजना में स्वीकृत प्रस्तावों में से कई विकास कार्यों के लिए धन नहीं जारी किया जा सका है। इसके चलते प्रस्तावित विकास कार्यों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इतना ही नहीं पिछले पांच सालों में जिला योजना में भारी भरकम बजट का प्रस्ताव होता है लेकिन कभी भी 50 फीसदी भी धन नहीं मिल पाता है।
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जिला योजना जिले के विकास कार्यों की रूपरेखा होती है। हर वर्ष जिला योजना समिति की बैठकों में अरबों रुपये के प्रस्ताव पास किए जाते हैं लेकिन साल के अंत में तमाम प्रस्तावित विकास योजनाएं बेमानी हो जाती हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह बजट का जारी न होना होता है। इस वर्ष 2021-22 में अनुमोदित 61594.60 लाख के सापेक्ष 724.49 लाख ही अवमुक्त किए हैं, जो अनुमोदन के सापेक्ष 1.18 फीसदी है। ऐसे में वित्तीय वर्ष 2021-22 के अंतिम माह बीतने को है लिहाजा विकास योजनाएं बेमानी ही रह गईं।
कुछ खास योजनाओं पर नजर डालें तो रोजगार कार्यक्रम के लिए अनुमोदित 14126.740 लाख, प्रधानमंत्री आवास योजना को अनुमोदित 14400 लाख, प्राथमिक शिक्षा के लिए अनुमोदित 2185 लाख, माध्यमिक शिक्षा के लिए 250 लाख, परिवार कल्याण में 760 लाख के सापेक्ष, ग्रामीण स्वच्छता में 2014.98 लाख, समाज कल्याण में 3383.300 लाख के सापेक्ष विभागों की ओर से कोई धन अवमुक्त नहीं किया गया है। इसके अलावा सड़क एवं पुल के लिए अनुमोदित 5138.20 लाख, वन विभाग 1232.600 लाख, पंचायती राज 2138.28 लाख, एलोपैथी 2041 लाख, नगर विकास 1604 लाख के सापेक्ष कोई धनराशि अवमुक्त नहीं है। इस तरह कुल 51 योजनाओं के लिए किए गए अनुमोदन 61594.60 लाख के सापेक्ष महज पांच योजनाओं के लिए कुल 724.49 लाख ही अवमुक्त है। इसमें सबसे अधिक वन विभाग के लिए अनुमोदित 1228.60 लाख के सापेक्ष 501.75 लाख अवमुक्त है। लेकिन अवमुक्त पूरी धनराशि भी खर्च नहीं हो सकी है। अब तक अवमुक्त कुल 524.49 लाख के सापेक्ष 87.25 यानि 632.08 ही खर्च हो सका है। अब इस धनराशि को वित्तीय वर्ष में खपाने का कार्य किया जा रहा है।
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