Ballia News: वाराणसी से पहुंची बड़ी क्रेन की मदद से दोपहर दो बजे के बाद हटाने का काम शुरू हुआ। क्रेन की मदद से इंजन को ट्रेलर पर लादकर कर सकेंड इंट्री गेट के पास बने फाउंडेशन तक पहुंचाया गया। सात सौ मीटर की दूरी दो घंटे में पूरी हुई। रेलवे व ठेकेदार की पूरी टीम मुस्तैद रही।
बलिया रेलवे स्टेशन के सामने आठ वर्ष पूर्व लगा डीजल इंजन चौथे दिन हट गया। रविवार से इंजन हटाने का काम चल रहा था। इस दौरान चित्तू पांडेय चौराहे से मालगोदाम तक आवागमन बाधित रहा। एक घंटे तक रूट डायवर्ट रहा। दोपहर दो बजे से हटाने का काम शुरू हुआ देर शाम नौ बजे के बाद नए फाउंडेशन पर इंजन स्थापित हुआ। इस दौरान स्टेशन परिसर में गहमा गहमी बनी रही।
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सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आरपीएफ, जीआरपी, ओक्डेनगंज पुलिस मुस्तैद रही। यातायात प्रभारी समद खान जवानों पूरी टीम के साथ तैनात रहे। इंजन को स्टेशन गेट के सामने से हटाकर सेकंड इंट्री गेट के बगल में बनकर तैनात फाउंडेशन पर स्थापित करना था।
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इंजन के पास बिजली ट्रांसफार्मर व ऊपर से गुजर रही एचटी लाइन हटाने के लिए शट डाउन की परमिशन बिजली निगम से न मिलने के कारण पहले दिन नहीं हो सका। दूसरे दिन क्रेन की कमी सामने आई। तीसरे दिन इंजन हटाने के लिए तीन क्रेन लगी थी। उसी दौरान एक क्रेन खराब हो गई।
स्टेशन अधीक्षक सुनील सिंह ने बताया की सकुशल इंजन नए फाउंडेशन पर स्थापित हो गया। माडल रेलवे स्टेशन पर सुंदरीकरण सहित कई योजनाओं का शिलान्यास को लेकर वर्ष 2015 में तत्कालीन रेलमंत्री के आगमन पर रेलवे स्टेशन के सामने डीजल इंजन स्थापित किया गया था।
स्टेशन के सामने डीजल इंजन रखने के कारण एनएच-31 से स्टेशन से गुजरने वालों को स्टेशन का मुख्य गेट दिखाई ही नहीं पड़ रहा था। स्थानीय लोगों ने कई बार इंजन को हटाने की मांग कर चुके हैं। स्टेशन पर 42 करोड़ रुपये की लागत से कार्य चल रहा है। स्टेशन भवन को हेरिटेज भवन के रूप से विकसित किया जा रहा है। स्टेशन भवन सड़क से दिखे इसके लिए डीजल इंजन को हटाया जा रहा है।