बदलते मौसम में डेंगू और संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। बलिया जिले में इस वर्ष अब तक 12 डेंगू के मरीज मिल चुके हैं। इसे देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से रोगों से बचाव का खाका तैयार कर लिया गया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से पहल शुरू कर दी गई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों और नगरीय इलाके में निकायों की नींद नहीं खुली है। नालियां चोक पड़ी हैं। चारों तरफ जलभराव है। ऐसे में स्थितियों के बिगड़ने से इंकार नहीं किया जा सकता।
शहर के किसी मोहल्ले में भी चले जाएं, वहां नालियां चोक मिलेंगी। कई व्यावसायिक संस्थाएं और मैरेज हाल सड़क पर पानी गिरा रहे हैं, जिससे मोहल्लों की सड़कों पर भी पानी जमा है। जल निकासी की व्यवस्था बेहतर न होने के चलते बारिश ने स्थिति और बिगाड़ दी है। इसके बाद भी नगरपालिका और ग्रामीण इलाके में ब्लॉक स्तर के जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। संक्रामक रोगों से लड़ने के लिए शहर से लेकर गांव तक स्वच्छता की बयार तो कागजों में खूब बह रही है, मगर शहर और गांव गंदगी से पटे हैं। सूत्रों के अनुसार, बुखार, खांसी और जुकाम से बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में प्रभावित हैं मगर जिम्मेदार केवल इनके इलाज तक ही कार्रवाई कर रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के डीएमओ डॉ. सुनील कुमार यादव ने कहा कि संक्रामक रोगों की चुनौती से लड़ने को विभाग तैयार है। शहर में सफाई की जिम्मेदारी नगरपालिका तो गांव में ब्लॉक व ग्राम पंचायत की है।
बोले शहरवासी - घर में चला जाता है नाले का पानी
बलिया शहर के काजीपुरा निवासी बेलाल ने कहा कि केवल कागजों में सफाई और जल निकासी की व्यवस्था है। ऐसे में संक्रामक बीमारी का खतरा शहर से गांव तक है। जिम्मेदार केवल कागजों में लड़ने की तैयारी कर चुके हैं। कोरोना की तर्ज पर ही वायरल फीवर और अन्य बीमारियों के इलाज की यहां व्यवस्था है। जापलिनगंज निवासी अजय मिश्रा ने कहा कि मोहल्ले की नाली पूरी तरह चोक है। यहां पानी सड़क पर बह रहा है। रास्ते पर नालियों से निकला गंदा पानी लोगों को दर्द दे रहा है, मगर जिम्मेदार ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। फिर कैसे संभव है कि संक्रामक रोग से लड़ा जाएगा। कहा कि घर तो सड़क पर है, मगर नाले का पानी घर में चला आता है। कभी सफाई हुई तो और स्थिति खराब हो जाती है। अव्यवस्थित नाला के चलते शहर के लोग परेशान हैं।
काजीपुरा में बीमारी का खतरा अधिक
शहर के काजीपुरा मोहल्ला में यहां करीब पांच सौ घर हैं, मगर यहां 12 माह गंदा पानी भरा रहता है। यहां करीब दो से तीन फीट पानी लगा है। इसमें से होकर लोग आने जाने को मजबूर हैं। इसके चलते इस पूरे इलाके में संक्रामक रोगों का खतरा बना हुआ है। नगरपालिका के अध्यक्ष से लगायत बात विधायक सदर तक पहुंची, मगर कोई परिणाम नहीं है। मोहल्ला निवासी आसिफ की माने तो समस्या से निजात के लिए कई बार उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया गया। इतना ही नहीं, मोहल्लवासियों ने आंदोलन भी किया, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात जैसा ही है।
इन स्थानों पर मिले डेंगू के मरीज
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुनील कुमार यादव के अनुसार, अब तक जिले में 12 डेंगू के मरीज चिह्नित किए गए हैं, जिनमें दुबहड़, रेवती, रतसर, बेरुआरबारी, चिलकहर, सोनवानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा नगर के सटे रामपुर महावल, बहादुरपुर और बहेरी ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
जिले भर में दिए गए हैं छिड़काव और फॉगिंग के निर्देश
शहर सहित जिले भर में एंटी लार्वा छिड़काव और फॉगिंग के निर्देश दिए गए हैं। जहां डेंगू के मरीज मिले हैं, वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम खुद जाकर छिड़काव आदि करा रही है। पंचायती राज विभाग से कहा गया है कि वह हर गांव में हर दिन सफाई करें, जहां जलभराव हो उसे तत्काल दूर कराएं। संक्रामक रोगों की स्थिति को देखते हुए नगरपालिका को भी सफाई कराने को कहा गया है। - डॉ. सुनील यादव, डीएमओ, बलिया
शहरी क्षेत्र में सफाई के लिए टीम उतारी गई है। छिड़काव व फागिंग कराने की योजना नालियों में एंटी लार्वा का छिड़काव पर काम शुरू हो गया है। - दिनेश कुमार विश्वकर्मा, ईओ, नगर पालिका परिषद, बलिया