सऊदी अरब से बलिया स्थित गांव लाया गया शव
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रोजी-रोटी के चक्कर में सऊदी अरब काम करने गए बलिया निवासी युवक की तीन माह पहले मौत हो गई। उसका शव अथक प्रयास के बाद सोमवार को पैतृक गांव पहुंचा। उसके अंतिम दर्शन के इंतजार में परिजनों की आंखें पथरा गईं थीं जो शव को देखते ही छलक उठीं। कोरोना संक्रमण के पहले ही वह आठ अप्रैल 2019 को रियाद (सऊदी अरब) गया था। काम करते समय ऊंचाई से गिरने के कारण 30 जून कोमौत हो गई थी। शव को स्वदेश लाने का सफर आसान नहीं था।
अरब देशों के कानून के कारण काफी मशक्कत करने पर केंद्र सरकार की ओर से शव को भारत लाया जा सका है। 30 जून को सुभाष की मौत के तीन दिन बाद परिजनों को पता चला था कि उनकी मौत हो चुकी है। जिले के एक समाजसेवी की पहल पर विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी ने इसके लिए दूतावास को पत्र लिखा था। रविवार की सुबह शव दिल्ली एयरपोर्ट पर आया। यहां से स्थानीय औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सोमवार को शव को एंबुलेंस से बसारिकपुर लाया गया।
इस मामले के सभी दस्तावेज राजनीतिक दूतावास रियाद और उसके बाद वाणिज्य दूतावास इददाह से संपर्क कर शव को देश तक पहुंचाने का दबाव बनाया। तीन अक्तूबर को दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल पर शव पहुंचा। वहां से सड़क के रास्ते बलिया उनके पैतृक गांव लाया गया।
आजमगढ़: सऊदी से शव पहुंचते ही परिजनों में मचा कोहराम
आजमगढ़ के सरायमीर थाना क्षेत्र के ओहदारीपुर गांव निवासी युवक की सऊदी में 11 अगस्त को मौत हो गई थी। रविवार को मृतक का शव उसके घर पहुंचा। शव घर पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। ओहदारीपुर गांव निवासी 28 वर्षीय दिलीप कुमार पुत्र बसंत रोजी रोटी के लिए सऊदी के दम्माम शहर गया था। जहां समय से वेतन न मिलने पर वह भाग कर रियाद शहर चला गया और वहां स्लाइडिंग का काम करने लगा।
बीते 11 अगस्त को उसकी सऊदी में ही एक सड़क हादसे में मौत हो गई। लगभग दो माह बाद दिलीप का शव सऊदी से उसके गांव पहुंचा। शव घर पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। अंतिम क्रिया कर्म की सभी रस्मो को अदा करने के बाद दिलीप का अंतिम संस्कार कर दिया गया।