बलिया के रामगढ़ में करीब छह माह पहले पुलवामा आतंकी हमले में घायल सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर और बलिया के बेटे अजय कुमार तिवारी (54) को घटना के एक सप्ताह बाद ड्यूटी के दौरान ब्रेन हैमरेज हो गया। वह कोमा में चले गए थे। दिल्ली के पर्क अस्पताल में मंगलवार को उनका निधन हो गया। बृहस्पतिवार को हल्दी थाना क्षेत्र के बगही गांव में उनका पार्थिव शरीर पहुंचा तो शोकाकुल लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। सभी उनकी अंतिम झलक पाने को बेताब दिखे। गंगा नदी के पचरुखिया हुकुम छपरा घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि हुई। बड़े पुत्र मोहित ने मुखाग्नि दी।
अजय सीआरपीएफ में सब इंस्पेक्टर थे। उनकी तैनाती पुलवामा में थी। बताया जाता है कि 26 अक्तूबर 2020 को आतंकी हमले में अजय घायल हो गए थे। एक सप्ताह बाद 4 नवंबर को अजय को ड्यूटी के दौरान ब्रेन हेमरेज हो गया। जिसके चलते वह कोमा में चले गए। उनके ब्रेन का ऑपरेशन पुलवामा में ही किया गया था। इसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया था। पर्क अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
मंगलवार को उनका निधन हो गया। पार्थिव शरीर दिल्ली से हवाई जहाज द्वारा बृहस्पतिवार को वाराणसी लाया गया। इसके बाद पहाड़िया स्थित सीआरपीएफ के 95वीं बटालियन के जवान उनका पार्थिव शरीर लेकर दोपहर में उनके पैतृक गांव बगही पहुंचे। लोगों ने माटी के लाल का अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। पत्नी निशा, पुत्री अंजली, बेटे मोहित व अंकुश का रो रोकर बुरा हाल था। हुकुम छपरा घाट पर बटालियन ने साथी को गार्ड आफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी। इस मौके पर सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट ज्ञानरंजन, एसआई बीके शर्मा, हवलदार अभिमन्यु, हवलदार राकेश कुमार, पूर्व ग्राम प्रधान संजय कुमार ओझा, समाजसेवी नितेश कुमार सिंह, अवधेश मिश्रा, मुन्ना मिश्रा, गोपाल जी गुप्ता, विजय तिवारी आदि रहे।