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राशनकार्ड की संख्या में हेरफेर कर होता है अनाज का खेल

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बलिया। जिला पूर्ति विभाग राशनकार्ड की सूची में हर महीने खेल करता है और इसकी आड़ में अनाज की कालाबाजारी भी होती है। यहां तक कि शासन से निर्धारित अंत्योदय कार्ड की संख्या में भी हेरफेर किया जाता है जबकि निर्धारित लक्ष्य के अनुसार हर महीने खाद्यान्न का आवंटन होता है।
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जिले में साढ़े तीन साल पहले एनएफएसए (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम) लागू किया गया। लेकिन आपूर्ति विभाग में अभी तक कार्डधारकों का डाटा दुरुस्त नहीं हो सका है। आए दिन राशनकार्ड में कोई न कोई बदलाव हो जाता है और इसके चलते 11 माह पहले वितरण को आए राशनकार्ड जिला पूर्ति कार्यालय से लेकर ब्लाकों पर डंप है। बताया जाता है कि राशनकार्ड संशोधन की आड़ में अनाज की कालाबाजारी खेल किया जाता है। अनाज उठान के पहले राशनकार्ड व यूनिट की संख्या अधिक रहती है और उठान के बाद वितरण के समय कई राशनकार्ड व कुछ राशनकार्ड के यूनिट को कम कर दिया जाता है। जिला पूर्ति विभाग में यह गोरखधंधा हर महीने किया जाता है। वर्तमान में जिले में केवल दो तरह के कुल 612406 हैं जिसमें अन्त्योदय के 101693 व पात्र गृहस्थी के 510713 हैं। जबकि करीब 10 दिनों पहले 28 दिसंबर को जिले कुल राशनकार्ड की संख्या 612588 थे जिसमें अन्त्योदय के 101681 व पात्र गृहस्थी के 510907 थे। इतना ही नहीं इसके करीब एक माह पहले 26 नवंबर को जिले में
कुल 618958 राशन कार्डधारक प्रचलन में रहे। जिसमें अन्त्योदय के 101676 तथा पात्र गृहस्थी के 517282 कार्डधारक थे। इन कार्डधारकों के संशोधन काम करीब ढाई सालों से चल रहा है और रोजाना राशन कार्ड को काटने, जोड़ने व यूनिट में हेर-फेर का खेल किया जा रहा है। इसके चलते कार्डधारक परेशान हो गए हैं।
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अन्त्योदय कार्ड की संख्या में होता है बदलाव, आज भी 20 कार्ड कम
बलिया। शासन की ओर से जिले के लिए कुल 101701 राशनकार्ड का लक्ष्य निर्धारित है और इसके सापेक्ष हर महीने खाद्यान्न का आवंटन भी किया जाता है। लेकिन इस कार्ड की संख्या में भी हेरफर कर राशन का गोलमाल किया जाता है क्योंकि इस योजना में प्रतिकार्ड 35 किलो अनाज वितरण का प्रावधान है। नजर डालें तो आज भी जिले में अन्त्योदय के 20 राशनकार्ड कम हैं।
राशनकार्ड को आधार से लिंक किया जा रहा है जिनके आधार नहीं हैं या आधार नंबर से मैच नहीं कर रहे हैं उनका नाम साफ्टवेयर से ही कट जा रहा है। अंत्योदय कार्ड में बदलाव बीडीओ से मिले प्रस्ताव के आधार पर ही किया जाता है।
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केजी पांडेय, डीएसओ, बलिया
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