बैरिया। बेमौसम बारिश के दूसरे दिन थमते ही धनुषयज्ञ मेले की रौनक लौट गई। इसके बाद संत सुदिष्ट बाबा के श्रद्धालु समाधि पर पहुंचकर बाबा के जयकारे लगाए और जमकर मेले का आनन्द उठाया।
धनुष यज्ञ मेले में नर्सरियां भी लगाई गई हैं जहां विभिन्न प्रकार के फल, फूल और औषधियों के पौधे लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हैं। मेले में आए लोग बंगाल की प्रसिद्ध हिमसागर और शमी के पौधे खरीद रहे हैं। मेले में बिहार से आए नर्सरियों से मेलार्थी आम के पौधों के साथ अन्य फल व फूल के पौधों को भी खरीद रहे है। हिमसागर आम की प्रजाति है जो अप्रैल और मई में ही पक कर तैयार हो जाता है लिहाजा इसे पौधे की बिक्री सबसे अधिक है। इसके अलावा चौसा, मलका व आम्रपाली आम का पौधा भी 100 रुपये में बिक रहे हैं। खास बात यह है कि ये पौधे रोपने के एक वर्ष बाद ही एक पेड़ में करीब 50 किलो आम का फल निकल जाते हैं। दूसरे वर्ष से पैदावार में बढ़ोतरी हो जाता है। वहीं साही लीची का पौधा लगाने के तीन वर्ष बाद लीची मिलनी शुरू हो जाएगी। इलाहाबादी अमरूद का पौधे, गुलाब आदि अन्य फूलों के पौधे की खूब बिक्री हो रही हैं। हाजीपुर निवासी नर्सरी मालिक उमेश व सूरज ने कहा कि हमारे यहां आम, अमरुद, लीची से लेकर फूलों का पौधा उपलब्ध हैं।
मेला मार्ग को कराया गया दुरुस्त : बैरिया। दो दिनों तक हुई बारिश से मेला मार्ग पर जलभराव और कीचड़ हो गया था जिससे मेलार्थियों और दुकानदारों को परेशानी हो रही थी। इसको देखते हुए मेला मार्ग को दुरुस्त कराया गया है। पूर्व प्रधान व मेला प्रबंधक गौरीशंकर प्रसाद ने शनिवार की सुबह मेले के सभी रास्ते पर राबिस गिरवा कर रास्ते को दुरुस्त करवाया।
सत्य को कहा नहीं जा सकता : पं. राजेंद्र : बैरिया। धनुष यज्ञ मेले में रामकथा के दौरान पं. राजेंद्र मिश्र ने कहा सत्य को कहा नहीं जा सकता तथा जो कहा जा सकता है वह सत्य नहीं है। सत्य की अभिव्यक्ति असंभव है। सत्य स्वरूप को न जानने के कारण ही आज दुनिया में धर्म के नाम पर विकृत मानसिकता का पोषण हो रहा है जो अमृत नहीं विष का कार्य कर रहा है। अज्ञान में भटकता हुआ व्यक्ति ज्ञान की गरिमा को कैसे स्वीकार कर सकता है। इस सम्पूर्ण सृष्टि का एक ही सत्य है कि सृष्टि अखण्ड है, एक ही है, समग्र है। इसमें सर्वत्र एकत्व है। इसे खण्ड में विभाजित नहीं किया जा सकता। सृष्टि में दिखाई देनेवाले विभिन्न रूप उस एक ही परम तत्व के विभिन्न रूप मात्र हैं। ये रूप बनते एवं बिगड़ते रहते हैं लेकिन इनका मूल तत्व सर्वदा एक रूप रहता है तथा वही सत्य है।