मृतक के चाचा तेज बहादुर उर्फ भोलाराम की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत किया है। रवि सिंह पुत्र प्रदीप सिंह, अभिषेक सिंह, धीरज सिंह, नीरज सिंह, बबी सिंह, आयुष, रेंचो, भूली सिंह, रोहित सिंह, उत्सव सिंह, समर्थ सिंह, अभिनव सिंह, रोहित पटेल को नामजद किया गया है। धरना समाप्त होने के बाद पुलिस अधीक्षक एस आनंद ने घटनास्थल चिलकहर रेलवे स्टेशन पर जाकर घटना के बारे में जानकारी ली। घटना प्लेटफार्म नंबर एक पर हुई थी। हत्यारोपियों की गिरफ्तारी करने का आश्वासन दिया।
चक्काजाम कर रहे परिजनों का आक्रोश पुलिस पर जमकर फूटा। परिजनों के साथ ही ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आरोप लगाया कि पुलिस ने मामले में थोड़ी सी गंभीरता दिखाई होती तो सुदीप की जान नहीं जाती। घटना के दिन भी एक दरोगा को फोन कर विवाद की जानकारी देने की बात कही गई। पुलिस को आक्रोशित ग्रामीणों का कोपभाजन भी बनना पड़ा।
परिजनों के अनुसार पहले भी आरोपियों से उनका तीन बार विवाद हो चुका था। हर बार पुलिस मामले में समझौता कराकर ठंडे बस्ती में डाल देती थी।
चार दिन पहले फिर मारपीट हुई थी, लेकिन पुलिस ने मामले में समझौता करा दिया। परिजन बार-बार यह कह रहे थे कि जब हम लोग थाने पर तहरीर लेकर जाते तो पुलिस गाली देकर भगा देती थी। थानाध्यक्ष पर कार्रवाई को लेकर लोगों में काफी आक्रोश दिखा। गांव में काफी तनाव है। चिलकहर रेलवे स्टेशन पर यदि जीआरपी पुलिस रहती तो शायद घटना नहीं हुई होती। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि स्टेशन पर कोई भी सुरक्षा कर्मी मौजूद नहीं था। करीब आधे घंटे तक विवाद होता रहा। सुदीप की पत्नी का रो-रोकर हाल-बेहाल रहा। एक पुत्र व एक पुत्री है।