बोर्ड परीक्षा के इंटरमीडिएट अंग्रेजी के पर्चे लीक होने की खबर उजागर करने वाले पत्रकारों की गिरफ्तारी के विरोध में शनिवार को पूरा बलिया लामबंद नजर आया। व्यापारियों ने बंद का दिल से समर्थन किया। नतीजतन शहर ही नहीं जिले के सभी कस्बों और चट्टी चौराहों की भी दुकानें बंद रहीं। चायपान तक की दुकानें नहीं खुलीं। पुलिस प्रशासन ने कुछ जगहों पर दुकानें खोलने के लिए दबाव डाला तो व्यापारियों से उनकी नोकझोंक भी हुई।
संयुक्त पत्रकार संघर्ष मोर्चा की ओर से किए गए बलिया बंद के आह्वान का व्यापक असर देखने को मिला। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और प्रशासनिक दमन के विरोध में व्यापारियों, शिक्षकों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की एकजुटता के चलते पहली बार ऐसा हुआ कि बिना किसी प्रतिरोध के दुकानें बंद रहीं। पुलिस ने शहर में व्यापारियों पर दबाव डालकर दुकानें खुलवाने की कोशिश की तो नोकझोंक भी हुई।
बंदी को सफल बनाने के लिए एक दिन पहले ही व्यापारियों, राजनीतिक दलों, पटरी दुकानदारों, छात्रों और शिक्षकों के संगठनों ने जिले भर में घूम कर लोगों से आंदोलन में सहयोग की अपील की थी और शनिवार को इसका असर दिखा। सुबह से ही व्यापारियों ने दुकानें बंद रखीं। कस्बों और चट्टी चौराहों तक की दुकानें नहीं खुलीं।