बंदियों के उत्पात और पथराव की सूचना पर पुलिस हरकत में आ गई और उच्चाधिकारियों के साथ दो गाड़ी पीएसी के साथ कई थानों की फोर्स जेल पहुंच गई। देर रात तक जेल के अंदर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
बलिया जिला जेल के जेलर अंजनी गुप्ता ने कहा कि रुटीन जांच के दौरान कुछ कैदियों द्वारा इसका विरोध किया गया था। तब समझाने से कैदी मान गए थे, लेकिन घात लगाकर कुछ कैदियों ने अचानक पथराव शुरू कर दिया। इसकी जानकारी पुलिस और जिले के आला अधिकारियों को दी गई। अब हालात नियंत्रण में है।
बलिया जिला कारागार में जब भी कोई नया जेल अधीक्षक आता है और सख्ती बरतना शुरू करता है तो कैदी तुरंत कोई न कोई बहाना लेकर हंगामा शुरू कर देते हैं। उनका मकसद होता है कि जेल में जैसा पहले से चल रहा है वैसा चलता रहे। सख्ती न बरती जाए। जेल प्रशासन व सिविल पुलिस के सख्ती के कारण उन्हें बौना साबित होना पड़ता है।
ललितपुर से स्थानांतरित होकर जिला कारागार बलिया आए नवागत जेल अधीक्षक यूपी मिश्रा ने जेल के अंदर से पैसे देकर फोन करने वालों पर सख्ती बरतनी शुरू की। पीसीओ से बात करने का आदेश जारी किया है। इस पर कैदियों ने अपनी गोपनीयता भंग होने की बात कह कर हंगामा करते रहे हैं।
बुधवार को जेल में मोबाइल की चेकिंग हो रही थी। इसे लेकर कैदियों ने करीब एक घंटे से ज्यादा तक बवाल काटा। जिसे जेल प्रशासन ने संभालने की कोशिश की। जब मामला उनसे बाहर होता दिखा तो उन्होंने जिला प्रशासन व सिविल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही कई थानों की फोर्स व आला अधिकारी जिला कारागार पहुंचे। जिनके अथक प्रयास के बाद कैदी शांत हुए।
बलिया जिला कारागार में कैदियों की ओर से बवाल करने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार बवाल हो चुके हैं। जिला कारागार में 13 जून 2020 को दो कैदी किसी बात को लेकर आपस में भिड़ गए थे। मामला इतना तूल पकड़ा कि दोनों पक्ष के समर्थक दूसरे पर ईंट-पत्थर चलाने लगे। विवाद की खबर लगते ही जेल प्रशासन हरकत में आ गया और तत्परता
दिखाते हुए हालात पर काबू पाया था। इसके पहले भी जेल में कई बार बवाल हो चुके हैं।