बलिया। जनपद में पाथ संस्था के तत्वावधान में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। पाथ संस्था के प्रोग्राम आफिसर डॉ. ज्ञान द्वारा बताया गया कि कालाजार एक जानलेवा रोग है, जो कि बालू मक्खी के काटने से फैलता है। यह अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में नमीं वाले स्थानों और मकानों के दरारों में पाई जाती है। इससे बचाव के लिए घर के आसपास साफ़-सफाई एवं मच्छरदानी का प्रयोग कर इस रोग से बचा जा सकता है।
बताया कि कालाजार मुख्यत: दो प्रकार का होता है, पहला- विसलर लिसमेनियासिस (वीएल), किसी व्यक्ति को 15 दिन से अधिक बुखार आना, भूख नहीं लगना, रोगी में खून की कमी, रोगी का वजन घटना, त्वचा के रंग का काला होना आदि कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। दूसरा पोस्ट कालाजार डरमल लिसमेनियासिस (पीकेडीएल) के मरीजों में इसका सबसे मुख्य लक्षण त्वचा पर सफेद धब्बा पाया जाता है। यदि किसी व्यक्ति में उपर्युक्त लक्षण मिले तो तत्काल अपने नजदीक के सीएचसी व पीएचसी केंद्र पर जांच कराएं। जिला चिकित्सालय पर इसका इलाज नि:शुल्क किया जाता है। इस मौके पर एसीएमओ डॉ. वीरेंद्र कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव, डॉ निशांत, डॉ. राहुल, पीसीआई संस्था के क्षेत्रीय प्रबंधक विकास द्विवेदी, वीबीडीसी रागिनी तिवारी, पाथ के कालाजार के ब्लॉक मॉनिटर विनोद, वेद, नीतीश, प्रशांत, राशिद, बीसीपीएम, एलटी, बीएचडब्लू और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे।
जिले में कालाजार प्रभावित हैं 14 ब्लॉक
बलिया। विकास खंड हनुमानगंज, मुरली छपरा, कोटवा, रेवती, दुबहर, चिलकहर, मनियर, बेलहरी, बेरूआरबारी, बांसडीह, सोहाव,पंदह, सीयर, गड़वार ब्लॉक है। जिले में जनवरी से आज तक कालाजार के 16 रोगी मिले हैं। जिसमें 11 वीएल (बुखार वाला कालाजार) के रोगी एवं पांच पीकेडीएल (चमड़े वाला कालाजार) के रोगी हैं। जिसमें कोटवा ब्लॉक से चार, मनियर ब्लॉक से दो, तथा दुबहर ब्लॉक से एक, बांसडीह ब्लॉक से एक, रेवती ब्लॉक से एक, चिलकहर ब्लॉक से दो, सोहाव ब्लॉक से एक, मुरली छपरा ब्लॉक से दो रोगी, पंदह में एक रोगी तथा बैरिया में एक रोगी मिला है। यह जानकारी जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव ने दी।