बलिया। अगले सत्र से आंगनबाड़ी केंद्रों पर शिक्षा की गुणवत्ता का मानक तय हो गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का कार्य पोषाहार वितरण के साथ बच्चों को तय मानक के अनुरूप गुणवत्तापरक शिक्षा देना भी होगा। इन बच्चों को 10 तक के अंकों के ज्ञान के साथ जोड़ने-घटाने का मानक निर्धारित है। मिशन प्रेरणा का नाम बदलकर निपुण भारत किया गया है। इसमें कक्षा एक से तीन तक के पाठ्यक्रम के मानक में परिवर्तन किया गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग में अभी तक मिशन प्रेरणा के तहत पाठ्यक्रम निर्धारित था। अब केंद्र सरकार ने मिशन प्रेरणा का नाम बदलकर निपुण भारत कर दिया है। इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी का दर्जा मिला है। इनमें पढ़ने वाले बच्चों को एक से 10 तक के अंकों का ज्ञान के साथ पांच अक्षर के सरल शब्द पढ़ने का पाठ्यक्रम निर्धारित है। इसका नाम बाल वाटिका रखा गया है। इसका मकसद कक्षा एक में प्रवेश के पहले बच्चे को अंक और अक्षर का ज्ञान कराना है। डीपीओ कृष्ण मुरारी पांडेय ने बताया कि एक से पांच साल के बच्चों को खेल आधारित शिक्षा देने का प्रावधान किया गया है। निपुण भारत की निगरानी के लिए ब्लॉक स्तर पर टास्क फोर्स गठित होगी। टास्क फोर्स के बीईओ अध्यक्ष होंगे। सीडीपीओ तथा भाषा और गणित के दो-दो विशेषज्ञ शिक्षक शामिल होंगे। बीएसए शिक्षक नामित करेंगे।