कस्बा के रामलीला मंच पर होने सोमवार की रात नारद मोह का कलाकारों ने जीवंत मंचन किया । रामलीला का शुभारंभ आयुर्वेद डा. ब्रजेश सिंह एवं पारस नाथ वर्मा ने क्रमश: दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान श्री राम की प्रमिमा के समक्ष पुष्प अर्पित कर किया। लीला में भरी सभा में नारद मुनि का घमंड चूर-चूर हो गया।
लीला के प्रारंभ में नारद मुनि हिमालाय की गुफा में तपस्या में लीन हो जाते हैं। जैसे ही यह सूचना इंद्र को मिलती है तो इंद्र यह सोच कर डर जाते है कि नारद मुनि हमारे कहीं सिंहासन को प्राप्त करने के लिए यह कठोर तपस्या तो नहीं कर रहे हैं। तब उनके मनमें संशय हुआ और कामदेव को बुलाकर उनकी तपस्या को भंग करने के लिए भेजते हैं और कामदेव विभिन्न तरीकों से नारद मुनि की तपस्या को भंग करने की कोशिश करते हैं। जब तपस्या भंग नहीं होती है तो उस समय नारद मुनि को दंभ आ जाता है और कहते हैं कि मैं तो कामदेव पर भी विजय प्राप्त कर लिया।
भगवान शंकर और विष्णु को भी सुनाए। इस बात को समझकर भगवान विष्णु ने नारद मुनि का घमंड चूर करने के लिए माया नगरी बनाकर शिलनिधि की पुत्रि विश्व मोहिनी का स्वयंवर रचाते हैं। इस स्वयंवर में नारद मुनि घमंड में चूर होकर भगवान विष्णु के पास जाते हैं और कहते हैं कि अपना रूप हमें दे दीजिए। तब विष्णु ने नारद मुनि को ध्यान में रखकर उनको बंदर के रूप में बदल देते हैं। तब नारद मुनि स्वयंवर में जाते हैं। कभी इधर तथा कभी उधर खड़े होकर विश्व मोहिनी को मोहित करने में मगन हो जाते हैं। लेकिन उसी समय भगवान विष्णु प्रकट होते हैं और विश्व मोहिनी भगवान विष्णु के गले में वरमाला डाल देते हैं। इस प्रकार नारद मुनि का घमंड चूर होता है। इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अमित सिंह कल्लू, श्रीनिवास तिवारी, राकेश मौर्य, अमरेश सिंह, श्यामु गुप्त, इंद्रजीत सिंह मौजूद रहे।