बलिया। जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की जांच करीब तीन वर्षों से बंद चल रहा है। कारण कि महिला चिकित्सालय में तैनात रेडियालॉजिस्ट का स्थानांतरण दूसरी जगह हो गया। हालात यह है कि प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों को बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। हालांकि वर्तमान में महिला चिकित्सालय में तैनात चिकित्सकों को इमरजेंसी के लिए अल्ट्रासाउंड की ट्रेनिंग दी गई है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है।
जिला महिला चिकित्सालय में करीब तीन साल से अल्ट्रासाउंड बंद चल रहा है। महिला चिकित्सालय की ओपीडी में प्रतिदिन करीब चार सौ मरीजों को देखा जाता है। जिसमें से करीब 50 को तो अल्ट्रासाउंड के लिए डाक्टर लिखती है। तत्कालीन और वर्तमान सीएमएस द्वारा शासन से लेकर जिला प्रशासन को रेडियोलाजिस्ट की तैनाती के लिए कई बार पत्र लिखा गया। इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम ने महिला चिकित्सालय में रेडियोलाजिस्ट तैनात करने के लिए तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया था। डीएम के निर्देश के क्रम में सीएमओ ने एसीएमओ/ रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजय सिंह की तैनाती महिला चिकित्सालय में की थी, जो सप्ताह में दो दिन अल्ट्रासाउंड करने का काम करते थे। इसी बीच उनका स्थानांतरण मऊ जनपद के लिए कर दिया गया था। जिसके बाद से महिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लटका हुआ है। वही मरीजों को बाहर से अधिक दाम देकर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है।
इस बाबत सीएमएस डाक्टर सुमिता सिन्हा ने बताया कि इसके लिए पूर्व में सीएमओ और डीएम को अवगत करा दिया गया है। फिलहाल मेरे साथ ही कुछ चिकित्सकों ने इमरजेंसी सेवा के लिए अल्ट्रासाउंड का प्रशिक्षण ले चुकी हैं, जो इमरजेंसी में किसी तरह काम चला ले रही हैं। अल्ट्रासाउंड को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए रेडियोलाजिस्ट की जरूरत है।
जिला महिला चिकित्सालय में रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध होते ही तैनाती कर दी जाएगी। इसके लिए प्रयास जारी है। जनपद में रेडियोलॉजिस्ट की काफी कमी है। - डॉ तन्मय कक्कड़, सीएमओ, बलिया