बलिया। लगभग 36 लाख की आबादी वाले जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में 37.73 फीसदी लोग गरीबी में जीवन जी रहे हैं। यहां नहीं शहरी क्षेत्र में भी 31.60 फीसद लोग गरीब हैं। देश के पहले बहुआयामी गरीबी सूचकांक में ये रिपोर्ट जारी की गई है।
जनपदवार जनसंख्या के मुकाबले बात करें तो जिला प्रदेश में गरीबी के मामले में 37वें आजमगढ़ 50वें और मऊ 51वें नंबर हैं। ग्रामीण क्षेत्र की बात करें तो आजमगढ़ और मऊ की अपेक्षा बलिया के लोग ज्यादा गरीब हैं। शहरी क्षेत्र में मंडल के तीनों जिलों में मऊ में ज्यादा गरीब हैं। नीति आयोग ने गत शुक्रवार को देशभर के राज्यों और जिलों में वर्ष 2015-16 के बेसलाइन सर्वे पर बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) जारी किया। यह सूचकांक लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के आधार पर जारी किया गया। इसमें पोषण, बाल किशोर मृत्यु दर, प्रसव पूर्व देखभाल, स्कूली शिक्षा, उपस्थिति, खाना पकाने के ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति और बैंक खाते की संख्या को शामिल किया गया। सूचकांक के अनुसार जनपद आंकड़ों में जनसंख्या के आधार पर बलिया में 37.11, आजमगढ़ में 32.77, मऊ में 32.70 फीसदी लोग गरीब हैं।
बलिया में ग्रामीण तो मऊ में शहरी आबादी ज्यादा गरीब
मंडल के ग्रामीण क्षेत्रों में बलिया में 37.73 फीसदी, आजमगढ़ में 36.21 फीसदी और मऊ में 32.55 फीसदी जनता गरीब है। शहरी आबादी की बात करें तो बलिया में कुल जनसंख्या की 31.60 फीसदी, आजमगढ़ में मात्र 5.94 फीसदी और मऊ में 33.14 फीसदी जनता गरीब है।
विभिन्न मामलों में तीन जनपदों के सूचकांक
सूचकांक में बलिया में पोषण का प्रतिशत 40.90 बताया गया है। आजमगढ़ में 45.42 और मऊ में 48.29 फीसद है। बाल और किशोर मृत्यु दर बलिया में 5.92, आजमगढ़ 3.78 और मऊ 4.72 फीसद है। प्रसवपूर्व देखभाल में बलिया 41, आजमगढ़ 40.39 और मऊ में 36.82 फीसद है। स्कूली शिक्षा बलिया में 11.86, आजमगढ़ में 10.30 और 9.07 फीसद है। स्कूल में उपस्थिति बलिया में 8.47, आजमगढ़ में 5.40, मऊ में 7.87 फीसद दिखाई गई है। खाना पकाने के ईंधन में बलिया 81.61, आजमगढ़ 87.08, मऊ 81.16 फीसद है। स्वच्छता में बलिया 76.73, आजमगढ़ 80.87 और मऊ 75.04 फीसद है। संपत्ति बलिया में 11.67, आजमगढ़ में 9.16, मऊ में 8.98 के पास नहीं है। बैंक खाते बलिया में 3.60, आजमगढ़ में 4.18 और मऊ 1.60 के पास नहीं है।