इंदरपुर। नगरा ब्लाॅक में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत बनीं ग्रामीण, स्वास्थ्य एवं पोषण समितियां पूरी तरह निष्क्रिय हैं। लेकिन यह समितियां सरकारी फाइलों में ही दौड़ रही हैं। इन समितियों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, स्वच्छता व पोषण से संबंधित मुद्दों पर काम करना है।
समिति का अध्यक्ष ग्राम प्रधान होते हैं तथा सचिव आशा वर्कर होती हैं। इन दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर से समिति के खाते का संचालन होता है। केंद्र सरकार की ओर से गांवों में दवाओं का छिड़काव व सफाई के लिए 10 हजार रुपये हर साल भेजे जाते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि यह पैसा कहां खर्च होता है यह किसी को पता नहीं है।
स्थिति यह है कि कतिपय प्रधानों को यह भी पता नहीं है कि गांव स्तर पर कोई ऐसी समिति भी है। कुछ ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिसमें बनी समिति के खाते में गत कई सालों से धनराशि डंप पड़ी है।
ढेंकवारी की ग्राम प्रधान सुनीता देवी का कहना है कि हमें ऐसी किसी समिति के विषय में पता ही नहीं है। नगरा ब्लाॅक के 94 ग्राम पंचायतों में से 84 ग्राम पंचायतों में समिति के खाते का संचालन हो रहा है। जूड़नपुर के ग्राम प्रधान अनिल कुमार मौर्या का कहना है कि समिति के खाते में गत कई साल से पैसा डंप पड़ा हुआ है। आशा वर्कर पैसा निकालती ही नहीं हैं।
इस बाबत आशा वर्करों का कहना है कि ग्राम प्रधान आधा पैसा मांगते हैं। इस लिए आहरण नहीं किया जाता है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डाॅ. राहुल सिंह का कहना है कि अभियान चला कर जांच की जाएगी। जहां पैसा डंप पड़ा है वहां का आहरण करा कर खर्च कराया जाएगा। निष्क्रिय पड़ी समितियों को सक्रिय किया जाएगा।