बहराइच। शहर के बलरामपुर-लखीमपुर हाईवे पर कल्पीपारा चौराहे से चंद कदम की दूरी पर एनएचआई की ओर से एक टोल प्लाजा का निर्माण कराया जा रहा है। इस टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहन चालकोें को अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी।
इसी मार्ग से भिनगा और मल्हीपुर जाने वाले लोग भी गुजरते हैं। टोल प्लाजा बनने से सवाल खड़े हो रहे हैं कि इसके निर्माण के बाद हाईवे का इस्तेमाल नहीं करने वालों को भी रुपये अदा करने पड़ेंगे। शहर में ट्रैफिक लोड बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
पीलीभीत से लखीमपुर-बहराइच होते हुए बस्ती तक राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य चल रहा है। नानपारा में पहले से ही एक टोल प्लाजा स्थित है। अब राजमार्ग का निर्माण करा रही एनएचआई ने इस पर बहराइच शहर के पास ही टोल प्लाजा का निर्माण शुरू करा दिया है। कल्पीपारा में दुलारपुर के वन विभाग की नर्सरी के पास ही टोल प्लाजा का निर्माण चल रहा है।
टोल प्लाजा के लिए भवन बनकर तैयार हो चुका है। पथ-वे का निर्माण कार्य तेजी से हो रहा है। टोल प्लाजा के निर्माण को देखकर अभी से सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। शहर के करीब टोल प्लाजा बनाए जाने से लोगों के बीच कई तरह की आशंकाएं भी खड़ी हो रही हैं।
समाजसेवी आलोक श्रीवास्तव का कहना है कि अगर हमें बहराइच से भिनगा जाना होगा। तब भी हमें रुपये अदा करने पड़ेंगे। जबकि हम हाईवे का प्रयोग भी नहीं करेंगे। इसी तरह मल्हीपुर जाने वाले वाहनों से भी वसूली की जाएगी। यह पूरी तरह से गलत है।
टोल प्लाजा का निर्माण गिलौला या रिसिया रोड पर ओवरब्रिज के निकट किया जाना चाहिए। वहीं, गल्लामंडी से श्रावस्ती, बलरामपुर और गोरखपुर जाने वाले माल वाहनों को भी टोल टैक्स देना पड़ेगा।
तो शहर में बढ़ेगा ट्रैफिक
कल्पीपारा को भारी वाहनों द्वारा बाईपास के रूप में प्रयोग किया जाता है। रिसिया, गिलौला, भिनगा, बलरामपुर, मल्हीपुर जाने वाले वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं। जबकि बगल में गल्लामंडी होने से यहां के व्यापारियों का भी आवागमन होता है। ऐसे में यहां पर टोल बनने के बाद लोग छावनी बाजार से ओवरब्रिज होते हुए गल्ला मंडी जाएंगे, जिससे शहर के मुख्य बाजार में ट्रैफिक समस्या और बढ़ जाएगी।
पीडब्ल्यूडी करा रहा निर्माण
पीलीभीत-बस्ती राजमार्ग 730 के निर्माण का काम चल रहा है। इस राजमार्ग का निर्माण लोक निर्माण विभाग उत्तर प्रदेश के एनएच डिवीजन की ओर से कराया जा रहा है। उसके द्वारा ही मामले की सही जानकारी दी जा सकती है।
- बीपी शुक्ला, डिप्टी मैनेजर, एनएचआई