विशेश्वरगंज में तालाब खोदाई में जेसीबी के प्रयोग की जांच करते लोकपाल मनरेगा।
बहराइच। विशेश्वरगंज विकासखंड के अमकोलवा गांव में मनरेगा योजना से कराए गए तालाब के जीर्णोद्धार में जेसीबी के प्रयोग के साक्ष्य मिले हैं। लोकपाल मनरेगा उमेश तिवारी ने स्थलीय निरीक्षण कर पूरे कार्य को श्रमदान घोषित कर दिया है। साथ ही जिम्मेदारों को दोबारा इसका दोहराव होने पर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
विशेश्वरगंज विकासखंड के ग्राम पंचायत पटना निवासी संतोष कुमार मिश्र ने लोकपाल के कार्यालय में शिकायती पत्र देकर अमकोलवा मजरे मेंं तालाब खोदाई कार्य में जेसीबी के प्रयोग का आरोप लगाया था। शिकायत पर लोकपाल मनरेगा उमेश तिवारी ने मंगलवार को स्थलीय निरीक्षण किया था। मौके पर सिर्फ दो श्रमिक कार्य करते मिले। लोकपाल के अनुसार, निरीक्षण के समय श्रमिकों ने बताया था कि जेसीबी का प्रयोग हुआ है, लेकिन जंगल व बांस के ठूंठ को हटाने के लिए।
श्रमिकों के बयान के आधार पर शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई जीपीएस टैग की फोटो देखी गई तो वहां कोई बांस या जंगल नहीं मिला। वहीं, फोटो में जेसीबी चलती मिली। मस्टररोल की जांच में 49 श्रमिक उपस्थित मिले। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि दो श्रमिकों को जेसीबी से हो रहे कार्य के सबूत को मिटाने के लिए रखा गया था। जांच में जेसीबी से कार्य होना पाया गया है। इसपर तालाब के जीर्णोद्धार कार्य को पूरी तरह शून्य कर दिया गया है और कार्य को श्रमदान घोषित कर दिया है।