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प्रदेश का सबसे बड़ा चहलारी घाट पुल जर्जर

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तेजवापुर (बहराइच)। विश्व बैंक की मदद से 350 करोड़ की लागत से बहराइच-सीतापुर मार्ग पर स्थित घाघरा नदी पर बने प्रदेश के सबसे बड़े पुल में जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं, सरिया निकलने लगी है। 2016 में आवागमन के लिए चालू किए गए इस पुल पर महज पांच सालों में ही लगभग तीन-तीन फीट चौड़े व लगभग आधा-आधा फीट गहरे गड्ढे बन गए हैं। इन गड्ढों की गहराई व चौड़ाई लगातार बढ़ती जा रही है जो बाढ़ के दिनों में बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
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जिले को सीतापुर जनपद से सीधे जोड़ने के लिए विकराल घाघरा नदी की लहरें बाधक बन रही थीं। इसे देखते हुए वर्ष 2006 में घाघरा नदी पर चहलारी घाट पुल बनाने का निर्णय लिया गया। तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री शिवपाल यादव ने अगस्त 2006 में विश्व बैंक की मदद से 350 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस 3,260 मीटर लंबे पुल का शिलान्यास किया।
पुल शिलान्यास होने से बहराइच व सीतापुर के लाखों लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। सबसे ज्यादा खुशी माल वाहक ट्रक संचालकों व वाहन मालिकों को हुई जिन्हें लखनऊ होते हुए सीतापुर जाना पड़ता था। शिलान्यास के बाद पुल निर्माण में घाघरा नदी की क्रूर लहरें कई बार बाधक बनीं जिसके चलते पुल निर्माण में 10 साल लग गये।
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बाढ़ के चलते चहलारी घाट पुल को तीन हिस्सों में बांट कर निर्माण शुरू किया गया। 2013 में बहराइच जिले की ओर से नदी पर 870 मीटर लंबे पुल का निर्माण करा दिया गया लेकिन इसी बीच नदी ने फिर कटान शुरू कर दी। इसके बाद सीतापुर की ओर से नदी पर सेतु निगम ने 1130 मीटर लंबे पुल का निर्माण किया।
इसके चलते नदी पुल के दोनो हिस्सों के बीच बहने लगी और निर्माण में इंजीनियरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दोनों छोरों के बीच अधूरे बचे 1260 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य कुछ दिन ठप रहा। विश्व बैंक के अधिशाषी अभियंता एसके गौतम के अनुसार बाद में पुल को पूर्ण कर लिया गया और आम राहगीरों के आवागमन के लिए 2016 में खोल दिया गया।
सपा शासन में बन कर तैयार हुए चहलारी घाट पुल का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। उन्होंने लखनऊ से इस विशाल पुल को बहराइच, सीतापुर व इससे गुजरने वाले प्रदेश के अन्य जनपदों के लोगों को समर्पित किया था। इसके बाद वह इसका निरीक्षण करने भी आए थे और इस पर फोटो भी खिंचवाया था।
गौरतलब है कि यह प्रदेश का सबसे लंबा पुल है। इससे पहले बस्ती-अंबेडकरनगर के बीच बना पुल प्रदेश का सबसे बड़ा पुल था जो बस्ती-लुंबनी-दुद्धी राष्ट्रीय राजमार्ग को कलवारी-टांडा से जोड़ता है।
स्टेट हाईवे 30-बी पर बने चहलारी घाट पुल से प्रतिदिन लगभग हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। बहराइच से 27 किलोमीटर की दूरी पर बने इस पुल की कुल लंबाई 3.26 किमी (10,700 फीट), चौड़ाई 10 मीटर (33 फीट) है। इस पुल के निर्माण से सीतापुर जनपद की दूरी मात्र 70 किलोमीटर रह गई है। पुल पर लगभग 10 स्थानों पर तीन-तीन फीट व इससे कम चौड़ाई के गड्ढे बन गए हैं।
ये गड्ढे लगभग आधे फीट गहरे हैं। गड्ढों का आलम यह है कि पुल के लिंटर में डाली गई सरिया दिखने लगी है। गड्ढों के कारण दो पहिया सवार गिरकर चोटिल हो रहे हैं, वहीं बड़े वाहनों के आवागमन के कारण इन गड्ढों की चौड़ाई व गहराई दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है।
चहलारी घाट पुल पर बने बड़े-बड़े गड्ढों को अगर समय रहते दुरुस्त नहीं किया तो बाढ़ के समय ये बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। बताते चलें कि बारिश के मौसम में घाघरा नदी अपना रौद्र रूप धारण कर लेती है और चहलारी घाट पुल को छूने को बेताब रहती है। ऐसे में गड्ढों के कारण होने वाले वाहनों के उछाल से बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बन गई है।
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पुल में मिली कमियों की सूचना मिल चुकी है। तत्काल प्रभाव से निर्देश गए हैं कि पुल की मरम्मत की जाए। जल्द ही पुल का निरीक्षण भी किया जाएगा।
-एके वर्मा, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग, बहराइच
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