बहराइच/महसी। सरयू ने जिले में तबाही मचानी शुरू कर दी है। नेपाल की बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी के चलते नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। सरयू के पानी से 16 गांव घिर गए हैं। महसी के जानकीनगर गांव का अस्तित्व खत्म हो चुका है, जबकि प्रशासन सिर्फ बयानबाजी में व्यस्त है।
गांव डूब रहे हैं, लोग जान बचाने की जद्दोजहद में हैं, लेकिन बाढ़ चौकियों पर सन्नाटा है। सरयू खतरे के निशान से 30 सेमी ऊपर बह रही है। नेपाल के पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश का सीधा असर बहराइच में पड़ा है। चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज से 3.49 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद से हालात और बिगड़ गए हैं। नतीजतन महसी और कैसरगंज तहसील के 16 गांव पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
जहां कल तक महसी का जानकीनगर गांव मौजूद था, आज वहां सरयू की धारा बह रही है। जानकीनगर में कुल 95 मकान थे, जो एक-एक कर बह गए और गांव का नामोनिशान मिट गया। भौरी, सिपहिया, औराही, महंतपुरवा, जोधापुरवा, माझा दरियाबुर्द और तारापुर खुर्द समेत कई गांवों में पानी घुस चुका है। ग्राम पंचायत गलकरा के मजरे भी पानी से घिरे हैं। करीब ढाई हजार से अधिक की आबादी चारों तरफ पानी से घिर चुकी है।
बाढ़ चौकियों पर सन्नाटा
हालात इतने गंभीर होने के बावजूद बाढ़ चौकियों पर सन्नाटा है। न राहत सामग्री पहुंची है, न ही कोई कर्मचारी मौके पर दिख रहा है। गांवों में अफरातफरी मची है और लोग अपनी जान व माल बचाने में जुटे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन सिर्फ कागजों पर नजर रख रहा है, जमीनी स्तर पर मदद शून्य है।
पलायन के लिए मजबूर हैं ग्रामीण
पानी बढ़ने के साथ ही सरयू का कहर कटान के रूप में भी सामने आ रहा है। नदी किनारे की उपजाऊ भूमि तेजी से काट रही है। छतरपुरवा, मल्हानपुरवा, नई बस्ती गोलागंज, भिखारीपुरवा, प्रभानपुरवा और चारीगाह बांध से सटे गांवों के लोग पलायन के लिए मजबूर हैं।
राजस्व कर्मियों को निगरानी के निर्देश
महसी तहसील के तहसीलदार विकास कुमार ने बताया कि सरकारी नाव और नाविकों को अलर्ट किया गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों में राजस्व कर्मियों को निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। नदी की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।