बहराइच। महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण हुए तीन वर्ष बीत गए, लेकिन अभी मेडिकल कॉलेज के कई विभागों में सुविधाएं न के बराबर हैं। जिस उद्देश्य से इसकी स्थापना हुई थी वह मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। परिणाम स्वरूप मरीजों को या तो लखनऊ भागना पड़ता है या फिर निजी अस्पताल में भर्ती होकर इलाज के लिए मोटी रकम अदा करनी पड़ती है। कॉलेज में इन दिनों सबसे दीनहीन हृदय रोग विभाग है, जहां सिर्फ मेडिसिन ट्रीटमेंट है, जांच अथवा भर्ती होने लायक कोई विशेष सुविधाएं नहीं है।
हृदय रोग विभाग में सबसे महत्वपूर्ण विषय जांच का है, जिसमें टीएमटी, ईको आदि होता है। हृदय रोग विभाग में इसकी कोई सुविधा नहीं है। केवल ईसीजी द्वारा जांच होती है, लेकिन गंभीर स्थिति में इसका भी कोई मतलब नहीं रह जाता है। हॉस्पिटल में चार बेड का आईसीयू स्थापित है, लेकिन किसी भी बेड में वेंटिलेटर संलग्न नहीं है। सिर्फ कागजी खानापूर्ति के लिए विभाग चलाया जा रहा है। शासन भी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। खास बात यह है कि विभाग एक एमबीबीएस चिकित्सक के सहारे चल रहा है। किसी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। स्टॉफ की भी जबरदस्त कमी है।
ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करके बनाया गया यह विभाग जिलेवासियों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है। हॉस्पिटल सूत्रों के मुताबिक विगत तीन वर्षों से संसाधनों को पूर्ण करने की मांग की जा रही है, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिलता है। शासन के अधिकारियों को लगातार पत्र लिखकर उन्हें यथा स्थिति के बारे में अवगत भी कराया जा रहा है, लेकिन अभी तक कुछ हाथ नहीं लगा। मेडिकल कॉलेज के नाम पर आसपास के जिलों से गंभीर मरीज यहां पहुंचते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें लखनऊ ही जाना पड़ता है।
शासन से मांगी गई हैं सुविधाएं
शासन को लगातार पत्र लिखा जा रहा है। आश्वासन मिला है कि जल्द हृदय रोग विभाग द्वारा मांगी गई सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। -एके साहनी, प्राचार्य, राजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज, बहराइच